The Honest Woodcutter Story In Hindi / दोस्तों, इस पोस्ट में हम नैतिकता के साथ ईमानदार लकड़हारा की कहानी साझा कर रहे हैं। यह कहानी बच्चों के लिए एक शिक्षाप्रद कहानी है, जो उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य , ईमानदारी और समझ के साथ काम करना सिखाती है। ईमानदार लकड़हारा की यह कहानी एक पुरानी कहानी है और हमेशा बच्चों के बीच लोकप्रिय रही है।


ईमानदार लकड़हारा की कहानी | The Honest Woodcutter Story In Hindi


ईमानदार लकड़हारा की कहानी | The Honest Woodcutter Story In Hindi


बहुत समय पहले की बात है। किसी जंगल के समीप एक छोटे से गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था। 


वह अपने परिवार के खर्चे को पुरा करने के लिए जंगल से सुखी लकड़ियों को काट कर बाजार मे बेचता था। 




वह रोज़ सुबह उठता और अपनी कुल्हाड़ी लेकर गाँव के समीप स्थित जंगल में जाकर लकड़ियाँ काटने लगता था। दोपहर तक सारे लकड़ियों को इकठ्ठा कर बाज़ार में बेचता था। लकड़ियों को बेच कर कुछ पैसे मिलते थे जिससे उसके और उसके परिवार की गुजर-बसर चल रही थी। 


सब कुछ ठीक चल रहा था। अपने कम पैसों मे ही खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रहा था। एक दिन की बात है, वह सुबह सवेरे जंगल में लकड़िया काटने के लिए पहुँचा। जंगल मे एक नदी बहती थी। उसी नदी के किनारे एक सूखा पेड़ था। गरीब लकड़हारा नदी के किनारे लगे सूखे पेड़ की लकड़ियाँ काटने लगा। 


वह लकड़िया काट रहा था, तभी अचानक उसकी कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूटकर नदी में जा गिरी। 


नदी बहुत गहरी थी और बहुत तेज पानी चल रही थी। नदी मे उतरकर कुल्हाड़ी को निकाल पाना गरीब लकड़हारे के लिए असंभव था। 


लकड़हारे के पास बस एक ही कुल्हाड़ी थी, उस कुल्हाड़ी के नदी में गिर जाने से वह बहुत परेशान हो गया। उसको यह चिंता सताने लगी अब वह अपनी जीविका कैसा चलायेगा। उसके पास अपना और अपने परिवार का जीविका चलाने का दूसरा कोई और साधन नहीं था। 




वह उदास और दु:खी होकर नदी किनारे खड़ा होकर रोने लगा और ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि वे उसकी कुल्हाड़ी किसी तरह उसे वापस दिला दें। वह बहुत जोर- जोर से रो रहा था। 


लकड़हारे के रोने की आवाज और सच्चे मन से की गई प्रार्थना सुनकर भगवान प्रकट हुए और लकड़हारे से पूछा, “पुत्र! तुम्हें क्या परेशानी है, तुम क्यों रो रहे हो?”


लकड़हारे ने अपनी कुल्हाड़ी नदी में गिरने की सारी बात दी और उनसे याचना की कि वे उसकी कुल्हाड़ी वापस दिला दें।


लकड़हारे की याचना सुनकर भगवान ने नदी मे डुबकी लगाई और तुरंत ही एक सोने की कुल्हाड़ी के साथ बाहर निकाले। वह कुल्हाड़ी सोने की थी। भगवान ने लकड़हारे से पूछा, “पुत्र! क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”


सोने की कुल्हाड़ी देखकर लकड़हारा बोला, “नहीं भगवन्, ये मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।”


भगवान ने पुनः पानी के अंदर गए और इस बार उन्होंने जो कुल्हाड़ी निकाली, वो चांदी की थी।


उन्होंने लकड़हारे से पूछा, “पुत्र! क्या ये तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”


लकड़हारा बोला, “नहीं देव, ये भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है”


भगवान बोले, “इसे अच्छी तरह से देख लो। हो सकता है यह कुल्हाड़ी तुम्हारी हो। यह चांदी की कुल्हाड़ी है। 


लकड़हारा बोला, “नही, चांदी और सोने के कुल्हाड़ी से लकड़ियाँ नहीं कटती है। यह मेरे किसी काम की नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है।.”




भगवान लकड़हारे की इमानदारी पर मुस्कुराये और पुनः पानी में डुबकी लगाई। इस बार जो कुल्हाड़ी उन्होंने निकाली, वह लोहे की थी। वह कुल्हाड़ी लकड़हारे को दिखाते हुए भगवान ने पूछा, “पुत्र! क्या ये है तुम्हारी कुल्हाड़ी?”


इस बार कुल्हाड़ी देख लकड़हारा बहुत खुश हुआ और बोला, “भगवन्, यही मेरी कुल्हाड़ी है। आपने मेरी कुल्हाड़ी लाकर दे दी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”


भगवान उस गरीब लकड़हारे की ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुए और बोले, “पुत्र! मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत अधिक प्रसन्न हूँ। इसलिए तुम्हें इस लोहे की कुल्हाड़ी के साथ सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी भी देता हूँ। तुम इन तीनों कुल्हाड़ी को खुशी-खुशी अपने घर ले जाओ। 


इतना कहकर भगवान अंतर्ध्यान हो गये। लकड़हारा अपनी ईमानदारी के कारण इतने बड़े पुरस्कार से पुरुस्कृत हुआ।




Moral of  The Honest Woodcutter Story In Hindi


Moral: ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है। 


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