The Thirsty Crow Story in Hindi - प्यासा कौवा की कहानी। मेरे प्रिय दोस्तों, आज के इस पोस्ट मे हम पढ़ने वाले हैं "The Thirsty Crow Story in Hindi" यानी प्यासा कौवा की कहानी।


यह बहुत पुरानी कहानी है। छोटे बच्चों के किताबों मे यह कहानी अक्सर देखने को मिल जाती है। Pyasa kowa ki kahani बहुत ही प्रेरणादायक है, इसीलिए आज भी इसकी प्रसिद्धि मे कोई कमी नही हुई है और आज भी बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी के बीच बहुत मशहूर है। 


आईये पढ़ते हैं प्यासे कौवे की कहानी - The Thirsty Crow Story in Hindi. और इस सेे प्रेरणादायक सिख हासिल करते हैं। 


प्यासा कौवा की कहानी | The Thirsty Crow Story In Hindi



प्यासा कौवा | The Thirsty Crow Story In Hindi
The Thirsty Crow Story


बहुत समय पहले की बात है, जून का महिना था। शरीर को झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही थी। 


एक दिन की बात है। इस चिलचिलाती गर्मी में एक  कौवा बहुत प्यासा था। सारे तालाब और नदी सुख गए थे। कहीं पर भी पानी नही था।


जंगल मे कहीं पर भी पानी न मिलने के कारण वह शहर की तरफ चला। पूरे दिन पानी की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। लेकिन उसे पानी कहीं नहीं मिला। 


वह पानी की तलाश मे उड़ता ही जा रहा था। उड़ते-उड़ते उसकी प्यास और तेज हो रही थी। जिस कारण उस प्यासे कौवे की हालत बहुत खराब होने लगी। 


थक कर वह शहर के महल के छत पर बैठ गया।

अब कौवे को लगने लगा था कि उसकी मौत बहुत नजदीक है। उसने इधर- उधर नजर दौड़ाई तभी उसकी नजर छत के कोने पर रखे एक घड़े पर पड़ी।


घड़े को देखकर उसको जान मे जान आई। वह तुरंत हिम्मत जुटाकर कोने मे रखे उस घड़े तक पहुंचा। 


कौवे घड़े के किनारे पर बैठ गया। घड़े मे पानी थी। 


पानी देखकर कौवा बहुत खुश हुआ। लेकिन उसकी खुशी बस थोड़ी देर के लिए ही थी, क्योंकि उस घड़े में पानी तो था, लेकिन इतना नहीं था कि कौवे की चोंच उस पानी तक पहुंच सके और वह पानी पी सके।


कौवे ने घड़े से पानी पीने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन वह अपनी कोशिश में सफल नहीं हो पाया, यानी वह पानी नही पी सका।


अब वह कौवा पहले से भी ज्यादा दुखी हो गया था, क्योंकि उसके पानी उसके पास होते हुए भी, वह अपनी प्यास नही बुझा सका था। 


कौवा उदास होकर इधर- उधर देख रहा था। कुछ देर इधर-उधर देखने के बाद कौवे की नजर घड़े के पास मे ही पड़े कंकड़ों पर पड़ी। कौवे ने जैसे ही घड़े के पास पड़े कंकड़ों को देखा तो तुरंत ही उसके मन में एक योजना आई।


उसने सोचा कि अगर वह एक - एक करके सारे कंकड़ को घड़े में डाल दे, तो घड़े का पानी ऊपर आ जाएगा और तब उसकी चोंच पानी तक पहुँच जायेगी और वो आसानी से पानी पी सकेगा। 


फिर क्या था, जैसे ही कौवे को यह विचार सूझी, उसने दोगुनी साहस के साथ आसपास पड़े कंकड़ों को एक एक करके घड़े में डालना शुरू कर दिया।


वह कंकड़ों को तब तक घड़े में डालता रहा, जब तक घड़े के पानी का सतह उसकी चोंच तक नहीं आ गया। 


काफी मेहनत के बाद उसने बहुत सारे कंकड़ घड़े मे डाल दिया तब घड़े के पानी का सतह ऊपर आ गया तब कौवे ने जी भरकर पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई। प्यास बुझा कर कौवा खुशी - खुशी उड़ गया। 


प्यासा कौवा की कहानी से सीख - Moral of The Thirsty Crow Story


प्रिय दोस्तों, इस छोटी सी कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी भी परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। हालात जैसा भी, आखरी सांस तक मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि मेहनत करने वाले की हार नही होती। अगर वह प्यासा कौवा अंत तक मेहनत नही करता तो प्यास के कारण उसकी मृत्यु हो जाती। आखरी सांस तक उस छोटे से कौवे ने मेहनत करके अपनी प्यास बुझाई। 


The Thirsty Crow Story in English | Thirsty Crow Story


The Thirsty Crow Story in English. My dear friends, in today's post, we are going to read "The Thirsty Crow Story in English" ie the story of the thirsty crow.


This is a very old story. This story is often seen in the books of young children. Thirsty Crow Story is very inspiring, that is why there is no shortage in its fame even today and it is still very popular among everyone from children to elders.


Let's read the story of thirsty crows - The Thirsty Crow Story and gain moral from this.


The Thirsty Crow Story in English with Moral


It was a long time ago, the month of June. The body was getting scorching heat.


Its just matter of one day. A crow was very thirsty in this scorching heat. All the ponds and rivers were dry. There was no water anywhere.


Due to not getting water anywhere in the forest, he went towards the city. Wandered all day in search of water. But he did not get water anywhere.


He was just flying in search of water. His thirst for flying was increasing. Due to which the condition of that thirsty crows started to worsen.


Tired, he sat on the terrace of the city palace.

Now the crows felt that his death was very close. He looked around here and there only when he saw a pitcher placed on the corner of the roof.


He came to know by looking at the pitcher. He immediately got up the courage to reach the pitcher in the corner.


The crow sat on the edge of the pitcher. There was water in the pitcher.


The crow was very happy to see the water. But his happiness was only for a while, because there was water in that pitcher, but not so much that the crow's beak could reach that water and he could drink the water.


The crow made every effort to drink water from the pitcher, but he could not succeed in his attempt, that is, he could not drink the water.


Now that crow was even more unhappy than before, because despite his water being near him, he could not quench his thirst.


The crow was looking sadly here and there. After looking here and there for some time, the crow's eye fell on the pebbles lying near the pitcher. As soon as the crows saw the pebbles lying near the pitcher, a plan immediately came to his mind.


He thought that if he put all the pebbles in the pot one by one, the water of the pot would come up and then his beak would reach the water and he would be able to drink water easily.


What was then, as soon as the crow got the idea, he started putting the pebbles lying in the pit one by one with double courage.


He kept putting the pebbles in the pitcher until the surface of the pot's water reached its beak.


After a lot of hard work, he put a lot of pebbles in the pot, then the surface of the water of the pitcher came up, then the crows drank water with gusto and quenched their thirst. After quenching thirst, the crow happily flew.


Moral of the story of thirsty crow


Dear friends, this short story teaches us that we should not lose courage under any circumstances. Regardless of the situation, one should keep working till the last breath, because the laborer does not lose. If that thirsty crow did not work till the end, he would die due to thirst. The little crows worked hard and quenched their thirst till the last breath.


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