मगरमच्छ और बंदर की कहानी- मेरे प्रिय दोस्तों, आज के इस पोस्ट मे हम पढ़ने वाले हैं "the monkey and the crocodile story in hindi" यानी मगरमच्छ और बंदर की कहानी हिंदी मे।


यह बहुत पुरानी कहानी है। छोटे बच्चों के किताबों मे यह कहानी अक्सर देखने को मिल जाती है।  magarmach aur bandar ki kahani बहुत ही प्रेरणादायक है, इसीलिए आज भी इसकी प्रसिद्धि मे कोई कमी नही हुई है और आज भी बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी के बीच बहुत मशहूर है। 


आईये पढ़ते हैं story of monkey and crocodile in hindi - magarmach aur bandar ki kahani. और इस सेे प्रेरणादायक सिख हासिल करते हैं।


मगरमच्छ और बंदर की कहानी - The Monkey and The Crocodile Story in Hindi


the monkey and the crocodile story in hindi" यानी मगरमच्छ और बंदर की कहानी


बहुत समय पहले की बात है। किसी जंगल से होकर एक नदी गुजरती थी। उस नदी के किनारे एक बहुत बड़ा जामून का पेड़ था। उस जामून के पेड़ पर मीठे और रसीले फल लगते थे।


एक बंदर बहुत दिनों से उस पेड़ पर रहता था। बंदर भरपेट जामून खाता और खूब मौज उड़ाता था। वह अकेला ही उस जामुन के पेड़ पर मजे में दिन गुजार रहा था। 


उसी नदी मे एक मगरमच्छ बंदर रहता था। एक दिन वह मगरमच्छ पानी मे तैरते हुए उस पेड़ के पास आया, जिस पर बंदर रहता था। 


पेड़ पर बैठे बंदर ने नदी मे तैर रहे मगरमच्छ से पूछा,


'तुम कौन हो भाई? और यहाँ क्यों घूम रहे हो?'


मगरमच्छ ने बंदर की और देखा और कहा, 'मै मगरमच्छ हूं। इसी नदी मे रहता हूं। खाने की तलाश में इधर-उधर घूम रहा हूं।'


बंदर ने कहा, 'यहां खाने की कोई कमी नहीं है। इस पेड़ पर बहुत सारे जामुन के फल लगे हैं। चखकर देखो, अगर अच्छे लगे तो मैं और दूंगा। जितने जी चाहें खाओ और अपनी भूख मिटाओ।' 


यह कह कर बंदर ने कुछ जामुन के मीठे फल तोड़कर मगरमच्छ की तरफ फेंका।


मगरमच्छ ने उन्हें चखकर कहा, 'वाह, ये तो बड़े मीठे हैं।'


यह सुनकर बंदर ने और भी फल गिरा दिए। मगरमच्छ उन्हें भी तुरंत चट कर गया और बोला, 'कल फिर आउंगा। क्या तुम ये मीठे फल मुझे और खिलाओगे?'


बंदर ने कहा, 'क्यों नहीं? तुम मेरे मेहमान हो। रोज आओ और जितने जी चाहें खाओ, इस पेड़ पर फल की कोई कमी नही है।'


मगरमच्छ अगले दिन आने का वादा करके चला गया। दूसरे दिन सुबह होते ही मगर बंदर के पास फल खाने के लिए आया। उसने भरपेट मीठे फल खाए और बंदर के साथ गपशप करता रहा। 


बंदर भी पेड़ पर अकेला रहता था। एक दोस्त पाकर वह भी बहुत खुश हुआ। 


अब मगरमच्छ रोज फल खाने के लिए आने लगा। मगरमच्छ और बंदर दोनों भरपेट फल खाते और बड़ी देर तक बातचीत करते रहते थे।


एक दिन की बात है। बंदर और मगरमच्छ दोनो अपने-अपने घरों की बातें कर रहे थे। बातों-बातों में बंदर ने कहा, 'मगरमच्छ भाई, मैं इस दुनिया में अकेला हूं। मेरा कोई भी नही है और तुम्हारे जैसा दोस्त पाकर अपने को बहुत भाग्यशाली समझता हूं।'


बंदर के जवाब मे मगरमच्छ ने कहा, 'भाई, मैं तो अकेला नहीं हूं। मेरे घर में मेरी एक पत्नी है। नदी के उस पार हमारा घर है।


बंदर ने कहा, 'यह बात तुमने पहले ही क्यों नहीं बताया कि तुम्हारी पत्नी भी है। मैं भाभी के लिए भी मीठे और रसीले फल भेजता।'


मगरमच्छ ने कहा, "मै बड़े शौक से अपनी पत्नी के लिए ये मीठे और रसीले फल ले जाऊंगा। 


जब मगरमच्छ जाने लगा तो बंदर ने उसकी पत्नी के लिए बहुत से पके हुए फल तोड़कर दिए।


मगरमच्छ की पत्नी को जामुन के मीठे और रसीले फल बहुत पसंद आए। उसने मगरमच्छ से कहा कि वह रोज इसी तरह रसीले फल लाया करे। 


मगरमच्छ ने कहा कि वह कोशिश करेगा। धीरे-धीरे बंदर और मगरमच्छ में गहरी दोस्ती हो गई। मगरमच्छ रोज बंदर से मिलने और फल खाने के लिए उस पेड़ के पास जाता। जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी ले जाता।


मगरमच्छ की पत्नी को फल खाना अच्छा लगता था लेकिन अपने पति का देर से घर लौटना, उसे बिल्कुल पसंद नहीं था। वह इसे रोकना चाहती थी। 


एक दिन उसने कहा, 'मुझे लगता है कि तुम झूठ बोलते हो। भला मगरमच्छ और बंदर में कहीं दोस्ती होती है? मगरमच्छ तो बंदर को मारकर खा जाते हैं।'


मगरमच्छ ने कहा, 'मैं सच बोल रहा हूं। वह बंदर बहुत भला है। हम दोनों एक-दूसरे को बहुत चाहते हैं। बेचारा रोज तुम्हारे लिए इतने सारे बढ़िया फल भेजता है। बंदर मेरा दोस्त न होता तो मैं ये फल कहां से लाता। मैं खुद तो पेड़ पर चढ़ नहीं सकता।'


मगरमच्छ की पत्नी बड़ी चालाक थी। उसने सोचा, 'अगर वह बंदर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका दिल कितना मीठा होगा। यदि उसका दिल खाने मिल जाए तो कितना मजा आएगा।' यह सोचकर उसने मगरमच्छ से कहा,


'एक दिन तुम अपने दोस्त को घर ले आओ। मैं उससे मिलना चाहती हूं।'


मगरमच्छ ने कहा, 'नहीं, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है। वह तो जमीन पर रहने वाला जानवर है। पानी में तो वह डूब ही जाएगा।'


उसकी पत्नी ने कहा, 'तुम उसको आने के लिए कहो। बंदर बहुत चालाक होते हैं। वह यहां आने का कोई न कोई उपाए निकाल ही लेगा।'


मगरमच्छ बंदर को बुलाना नही चाहता था। परंतु उसकी पत्नी रोज उससे पूछती कि बंदर कब आएगा। मगरमच्छ कोई न कोई बहाना बना देता था। ज्यों-ज्यों दिन गुजरते जाते, बंदर के मांस के लिए मगरमच्छ के पत्नी की इच्छा तीव्र होती जाती थी।


मगरमच्छ की पत्नी ने एक तरकीब सोची। एक दिन उसने बीमारी का बहाना किया और ऐसे आंसू बहाने लगी, मानो उसे बहुत तेज दर्द हो रहा है। मगरमच्छ अपनी पत्नी के बीमार हो जाने से बहुत दुखी था। वह अपनी पत्नी के पास बैठकर बोला, 'बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूं जिस से तुम जल्दी ठीक हो सको?'


पत्नी बोली, 'मैं बहुत बीमार हूं। मैंने जब वैद्य से पूछा तो उसने बताया कि जब तक मैं बंदर का कलेजा नहीं खाउंगी तब तक मैं ठीक नहीं हो सकती हूं।


बंदर का कलेजा' मगर ने आश्चर्य से पूछा।


मगरमच्छ की पत्नी ने कराहते हुए कहा, 'हां, बंदर का कलेजा। अगर तुम चाहते हो कि मैं बच जाउं तो अपने मित्र बंदर का कलेजा लाकर मुझे खिलाओ।'


मगरमच्छ ने दुखी होकर कहा, 'यह भला मैं कैसे कर सकता हूं? मेरा तो वही एक सच्चा दोस्त है जो मुझे रोज मीठे और रसीले फल खिलाता है। उस एकलौते मित्र को भला मैं कैसे मार सकता हूं?'


मगरमच्छ की बात सुनकर पत्नी ने कहा, 'अच्छा ऐसी बात है। अगर तुमको तुम्हारा दोस्त मुझसे अधिक प्यारा है तो तुम उसी के पास जाकर रहो। तुम्हारी यहाँ पर जरूरत नही है। तुम तो यह चाहते ही हो की मैं मर जाउं।'


मगरमच्छ मुसीबत में फंस गया। उसको समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे? बंदर का कलेजा लाता है तो उसका प्यारा दोस्त मारा जाएगा। नहीं लाता है तो उसकी पत्नी मर जाती है।


कुछ देर सोचने के बाद मगरमच्छ ने तय किया कि वह अपनी पत्नी का जीवन जैसे भी हो बचाएगा। 


यह सोचकर वह बंदर के पास गया। बंदर मगरमच्छ की प्रतिक्षा कर रहा था।


मगरमच्छ को देखते ही बंदर ने पूछा, 'क्यों दोस्त आज इतनी देर कैसे हो गई? सब कुशल तो है न?'


मगरमच्छ ने कहा, 'मेरा और मेरी पत्नी का झगड़ा हो गया है। वह कहती है कि मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूं क्योंकि मैंने तुम्हें अपने घर नहीं बुलाया है। वह तुमसे मिलना चाहती है। उसने कहा है कि मैं तुमको अपने साथ ले जाउं। अगर नहीं चलोगे तो वह मुझसे दुबारा झगड़ेगी।'


बंदर ने हंस कर कहा, 'बस इतनी सी बात थी। मैं भी भाभी से मिलना चाहता था। लेकिन मैं पानी में कैसे चल सकता हुँ? मैं तो डूब जाउंगा।'



मगरमच्छ ने कहा, 'उसकी चिंता मत करो। मैं तुमको अपनी पीठ पर बैठाकर ले जाउंगा।' 


बंदर तैयार हो गया। वह पेड़ से तुरंत उतरा और उछलकर मगर की पीठ पर सवार हो गया।


जैसे ही मगरमच्छ नदी के बीच में पहुंचा तो वह आगे जाने की बजाए पानी में डुबकी लगाने लगा। 


मगरमच्छ के इस हरकत से बंदर डर गया और बोला, 'क्या कर रहे हो भाई? अगर तुमने डुबकी लगाई तो मैं डूब जाउंगा, क्योंकि मुझे तैरना नही आता है।'


मगर ने कहा, 'मैं तो डुबकी लगाउंगा क्योंकि मैं तुमको मारना चाहता हूं।'


यह सुनकर बंदर संकट में पड़ गया। उसने कहा, 'क्यों भाई मुझे क्यों मारना चाहते हो? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?'


मगर ने कहा, 'मेरी पत्नी बीमार है। वैद्य ने उसका एक ही इलाज बताया है। यदि उसको बंदर का कलेजा मिल जाए तो वह बच जाएगी। यहां और कोई बंदर नहीं है। मैं तुम्हारा कलेजा ही अपनी पत्नी को खिलाउंगा।'


पहले तो बंदर भौचक्का रह गया। फिर उसने सोचा केवल चालाकी से अपनी जान बचाई जा सकती है।


उसने कहा, 'मेरे 'प्यारे दोस्त यह बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई। मै तो भाभी की जान बचाने के लिए अपना कलेजा खुशी-खुशी दे देता। लेकिन मै ने तो उसे जामुन के पेड़ पर ही छोड़ दिया है। तुमने पहले ही बता दिया होता तो मैं उसे साथ ले आता।'


'अच्छा ये बात है।' मगरमच्छ बोला।


'हां, चलो, जल्दी वापस चलो। कहीं तुम्हारी पत्नी की बीमारी ज्यादा बढ़ न जाए।'


मगर वापस पेड़ की तरफ बड़ी तेजी से तैरने लगा और पेड़ के पास पहुंच गया। नदी के किनारे पहुँचते ही बंदर ने छलांग लगाई और सीधे पेड़ पर चढ़ गया। उसने हंसकर मगरमच्छ से कहा, 'जाओ मूर्ख, अपने घर वापस चले जाओ। और अपनी दुष्ट पत्नी से बोलना कि तुम दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख हो। भला ऐसा कौन है जो अपना कलेजा निकालकर अलग रख सकता है।'


Magarmach Aur Bandar Ki Kahani से सिख


सीखः दोस्त या दुनिया के किसी भी इंसान के साथ कभी भी धोखेबाजी नहीं करनी चाहिए और संकट जैसा भी और जब भी आ जाए तो अगर धैर्य के साथ सोचा जाए तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी दूर हो सकती है। दूसरों को धोखा देने की कभी न सोचें। 


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प्रिय दोस्तों, यह था  मगरमच्छ और बंदर की कहानी हिंदी मे। मुझें उम्मीद है की आपको magarmach aur bandar की ये छोटी सी कहानी बहुत ही अच्छा लगा होगा और The Monkey and The Crocodile Story in Hindi ने आपको प्रेरित किया होगा। 


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