10 Best Moral Stories in Hindi for Class 2 | कक्षा 2 के लिए हिंदी नैतिक कहानियां

 

Moral Stories in Hindi for class 2: Hello friends, how are you? Today I am sharing the top 10 moral stories in Hindi for class 2. These short stories in Hindi are very valuable for class 2 and give very good moral.

 

आज के इस आर्टिकल मे, मै आप के साथ top 10 short stories in hindi for class 2 with moral share कर रहा हूँ। ये हिंदी नैतिक कहानियाँ बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। ये सभी कहानियों के अंत मे नैतिक शिक्षा दी गयी हैं। जो बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने मे बहुत मदद करेगी।

 

आईये इन top 10 moral story in hindi for class 2 पढ़ते हैं।

 

Top 10 Moral Short Stories in Hindi for Class 2


Moral Stories in Hindi for Class 2


01. एक ग्रामीण चूहा (Hindi Short Stories)


बहुत समय पहले किसी गांव मे एक चूहा रहता था। वह खेत में रहता था लेकिन उसकी मित्रता एक शहरी चूहा से हो गयी थी जो नजदीक के एक शहर में रहता था। 




एक दिन ग्रामीण चूहे ने अपने मित्र शहरी चूहे को खाने पर निमंत्रित किया। उसने अपने मित्र को मीठे-मीठे बेर, मूंगफली के दाने तथा कंदमूल खाने को दिए। लेकिन शहरी चूहे को खेतों का यह सादा खाना पसंद नही आया। उसने अपने मित्र चूहे से कहा, भाई! तुम्हारा यह देशी खाना मुझे पसंद नही आया। यह तो बड़ा घटिया किस्म का खाना है। और तो और इसमें कोई स्वाद भी नहीं है। एक बार तुम मेरे घर चलो, तो तुम्हें पता चलेगा कि बढ़िया और स्वादिष्ट खाना कैसा होता है!


बिना कुछ सोचे ग्रामीण चूहे ने भी शहरी चूहे का आमंत्रण स्वीकार कर लिया। जब वह शहर गया तो उसके शहरी मित्र ने उसे अजींर, खजूर, शहद, बिस्कुट, पावरोटी, मुरब्बा जैसे स्वादिष्ट भोजन खाने को दिया।

 


लेकिन शहर मे वे दोनो चूहे चैन से भोजन नही कर पा रहे थे। वहाँ बार-बार एक बिल्ली आ जाती और चूहों को अपनी जान बचाने के लिये भागना पड़ता था। शहरी चूहे का बिल भी बहुत छोटा और सँकरा था।

 


खेत मे आजाद रहने वाले चूहे ने कहा, तुम्हारा जीवन कितना है, भाई? मै तो यहाँ नही रह सकता हूँ। मैं अपने गांव जा रहा हूँ, वहाँ कम से कम शांतिपूर्वक खाना तो खा सकता हूँ। जल्द ही ग्रामीण चूहा अपने गांव वापस आ गया। अपने स्थान पर पहुँच कर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई।

 

शिक्षा : - शांति और निर्भयता मे ही सच्चा सुख कुछ भी नही है।


 

02. टिड्डा और चिंटी (Short Stories in Hindi for Class 2)

 

मई का महिना था, बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। खेतों मे अनाज भी भरपूर था। सुबह सवेरे एक टिड्डा भरपेट खाना खाकर गीत गाने में मस्त था। उसने देखा, कुछ चींटियाँ खाने की सामग्री ले जा रही हैं।

 


शायद वे इन खाने की सामग्री को भविष्य के लिए संग्रह कर रही थीं। चींटियों को देखकर वह हँसने लगा और उनमे से एक चींटी से कहा, "तुम सभी कितनी लालची हो! इस खुशी के मौके पर भी इतनी मेहनत कर रही हो!" चींटी ने जवाब दिया, "अरे टिड्डा भाई, हम लोग बरसात के मौसम मे खाने के लिए सामग्री एकत्र कर रहे हैं।"

 


गर्मी का मौसम समाप्त हुआ और बरसात शुरू हुई। आकाश में काले काले बादल छाने लगे और खुली धूप जाती रही! खेतों मे अनाज न होने के कारण टिड्डे के लिए भोजन जुटाना बहुत मुश्किल हो गया। भूखा मरने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही बचा था। तभी उसे गर्मी के दिनों मे खाने की सामग्री एकत्र करने वाले चिंटी की याद आयी। वह तुरंत ही चिंटी के पास गया

 

 


एक दिन टिड्डे चींटी के घर गया और उसका दरवाजा खटखटाया। उसने कहा, "चींटी बहन कृपा कर मुझे कुछ खाने के लिए दो। मैं बहुत भूखा हूँ।" चींटी ने जवाब दिया, "गर्मी के दिनों में तो तुम गीत में मगन होकर इधर-उधर घूमते रहे, अब बरसात के मौसम में कही जाकर नाचो। तुम जैसे आलसी को मैं एक भी दाना नहीं दे सकती।" और उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया।

 


शिक्षा -आज की बचत ही कल काम आती है।


 

03. किसान और जादुई बतख (Story in Hindi for Class 2 with Moral)


बहुत समय पहले किसी गांव मे एक किसान रहता था। उसके पास एक जादुई बतख थी जो रोज एक सोने का अंडा देती थी।

 


किसान रोज इस सोने के अंडे को बाजार में बेच देता था। इससे उसे अच्छी आमदनी हो जाती थी। बस क्या था, थोड़े ही दिनों में किसान बहुत अमीर हो गया। उसने एक बहुत बड़ा महल बनवाया और  अपनी पत्नी तथा बच्चों के साथ आनन्द से रहने लगा। अब उसे किसी चीज की कमी नही थी।

 


बहुत दिनों तक इसी प्रकार चलता रहा। सभी खुशी से रह रहे थे। एक दिन किसान ने सोचा, ये बतख रोज एक ही अंडे देती है, यदि मैं इस बतख के शरीर से सारे अंडे एक बार ही निकाल लूँ, तो मालामाल हो जाऊँगा।

 


बस क्या था, किसान ने एक बड़ा-सा चाकू लिया और बतख का पेट चीर डाला। लेकिन बतख के पेट में से उसे एक भी अंडा नही मिला। किसान को सारी बात समझ आ गयी। उसे अपनी गलती पर बहुत दुःख हुआ। उसकी हालत पागलों जैसी हो गयी। वह पछताने लगा। जिस बतख के अंडे से वह इतना अमीर हुआ था, अब वह बतख मर चुकी थी। 

 


शिक्षा - लालच बुरी बला है।


 

04. बैल और मेढक (Hindi Short Stories for class 2)


एक बार की बात है किसी तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक प्यासा बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जोर से डकारा। बैल के डकारने की अवाज सुनकर सभी छोटे छोटे मेढक डर गए। वे तेजी से भागते हुए अपनी दादी माँ के पास पहुँचे।



दादी माँ ने अपने पोते से पूछा, अरे क्या हुआ? तुम लोग इतना घबराए हुए क्यों हो?

 

सबसे छोटे मेढक ने कहा, दादी जी, अभी कुछ देर पहले एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में पानी पीने के लिए आया था। उसकी आवाज बहुत ही तेज और डरावना थी।


दादी माँ ने पूछा, कितना बड़ा था वह जानवर? नन्हे मेढक ने जवाब दिया, अरे, वह तो बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने चारो पैर फैलाकर और गाल फुलाकर कहा, वह इतना बड़ा था, क्या? छोटे मेढक ने फिर कहा, अरे नही दादी वह इससे भी बहुत बड़ा था। दादी माँ दादी ने फिर गाल पेट फुलाकर और चारो पैर फैलाकर कहा इससे बड़ा तो नही होगा। है न! 

 

 


नन्हे मेढक नें फिर वही जवाब दिया, नही दादी वह इससे भी बहुत बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने पेट को और फुलाया। फिर क्या था उसका पेट फट गया और वह मर गई।


शिक्षा - थोथा अभिमान विनाश का कारण होता है।


 

05. बंदर का इंसाफ (Best Hindi Moral Story for Class 2)

 

किसी शहर मे दो बिल्लियाँ साथ रहती थीं। एक दिन दोनों को रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर तुरंत उस केक के टुकड़े को उठा लिया। दूसरी बिल्ली उससे केक छीनने लगी।


पहली बिल्ली ने कहा, अरे चल जा यहाँ से! यह केक मेरा है क्योंकि पहले मैंने इसे उठाया है।


दूसरी बिल्ली तुरंत बोली, इसे पहले मैने देखा था, इसलिए यह मेरा हुआ। दोनो लड़ते लड़ते एक पेड़ के नीचे पहुंचे। 

 

उसी पेड़ पर एक बंदर बैठा था। दोनो बिल्लियो को लड़ते देख वह नीचे उतर आया। बंदर को देखकर बिल्लियो ने उससे झगड़ा निपटाने की प्रार्थना की। 

 

बंदर भी यही चाहता था, उसने तुरंत बोला - यह केक मुझे दो। मैं इसके दो बराबर बराबर हिस्से करूँगा और तुम दोनों को एक-एक हिस्सा दे दूँगा। इस तरह तुम दोनों का झगडा समाप्त हो जायेगा।


केक मिलते ही बंदर ने उसके दो टुकड़े किये। उसने दोनो टुकडो़ को बारी-बारी से देखा, फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा, दोनो टुकड़े बराबर नही हैं। यह टुकड़ा दूसरे टुकड़े से बड़ा है। उसने बड़े से टुकड़े से थोड़ा हिस्सा खा लिया। फिर भी दोनो हिस्से बराबर नही हुए। बंदर ने फिर बड़े हिस्से में से थोड़ा खा लिया। इस प्रकार बंदर बार बार बड़े टुकड़े में से थोड़ा-थोड़ा खाता रहा। 



फिर क्या था, अंत मे केक के केवल दो बहुत ही छोटे-छोटे टुकड़े बचे। बंदर नें बिल्लयो से कहा, ओ-हो-हो! अब भला इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हे कैसे दे सकता हूँ? चलो इसे भी मैं ही खा लेता हूँ। यह कहकर बंदर केक के दोनो छोटे-छोटे टुकड़े मुँह में डालकर चलता बना। बिल्लयो के झगड़ने के फायदा बंदर ने अच्छी तरह लिया।

 

शिक्षा - दो की लड़ाई मे तीसरे का फायदा। इसी लिए हमे आपस मे नही झगड़ना चाहिए। क्योंकि झगड़ने से कुछ हासिल नही होता। 

 



 

नोट: जल्द ही 5 और कहानियां आएँगी 

 

दोस्तों यह थी top 10 Moral Stories in Hindi for class 2. ये सभी कहानियाँ नैतिक है। और इन कहानियों से बच्चों को बहुत मदद मिलेगी।

 

आप को ये top 10 Hindi moral story for class 2 कैसी लगी हमे comment मे जरूर बताएं। अगर आप को ये कहानियाँ अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करें। 

 

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