22+ Best Moral Stories in Hindi for Class 2 | Short Stories in Hindi

 

22 Best Moral Stories in Hindi for Class 2 - कक्षा 2 के लिए हिंदी नैतिक कहानियां

 

Moral Stories in Hindi for class 2: Hello friends, how are you? Today I am sharing the top 22 moral stories in Hindi for class 2. These short stories in Hindi are very valuable for class 2 and give very good morals.

 

आज के इस आर्टिकल मे, मै आप के साथ top 22 short stories in hindi for class 2 with moral share कर रहा हूँ। ये हिंदी नैतिक कहानियाँ बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। ये सभी कहानियों के अंत मे नैतिक शिक्षा दी गयी हैं। जो बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने मे बहुत मदद करेगी।


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आईये इन top 22 moral stories in Hindi for class 2 पढ़ते हैं।

 

Top 22 Moral Short Stories in Hindi for Class 2


Moral Stories in Hindi for Class 2

01. एक ग्रामीण चूहा (Hindi Short Stories for class 2)


बहुत समय पहले किसी गांव मे एक चूहा रहता था। वह खेत में रहता था लेकिन उसकी मित्रता एक शहरी चूहा से हो गयी थी जो नजदीक के एक शहर में रहता था। 



एक दिन ग्रामीण चूहे ने अपने मित्र शहरी चूहे को खाने पर निमंत्रित किया। उसने अपने मित्र को मीठे-मीठे बेर, मूंगफली के दाने तथा कंदमूल खाने को दिए। लेकिन शहरी चूहे को खेतों का यह सादा खाना पसंद नही आया। उसने अपने मित्र चूहे से कहा, भाई! तुम्हारा यह देशी खाना मुझे पसंद नही आया। यह तो बड़ा घटिया किस्म का खाना है। और तो और इसमें कोई स्वाद भी नहीं है। एक बार तुम मेरे घर चलो, तो तुम्हें पता चलेगा कि बढ़िया और स्वादिष्ट खाना कैसा होता है!


बिना कुछ सोचे ग्रामीण चूहे ने भी शहरी चूहे का आमंत्रण स्वीकार कर लिया। जब वह शहर गया तो उसके शहरी मित्र ने उसे अजींर, खजूर, शहद, बिस्कुट, पावरोटी, मुरब्बा जैसे स्वादिष्ट भोजन खाने को दिया।

 


लेकिन शहर मे वे दोनो चूहे चैन से भोजन नही कर पा रहे थे। वहाँ बार-बार एक बिल्ली आ जाती और चूहों को अपनी जान बचाने के लिये भागना पड़ता था। शहरी चूहे का बिल भी बहुत छोटा और सँकरा था।

 


खेत मे आजाद रहने वाले चूहे ने कहा, तुम्हारा जीवन कितना है, भाई? मै तो यहाँ नही रह सकता हूँ। मैं अपने गांव जा रहा हूँ, वहाँ कम से कम शांतिपूर्वक खाना तो खा सकता हूँ। जल्द ही ग्रामीण चूहा अपने गांव वापस आ गया। अपने स्थान पर पहुँच कर उसे बड़ी प्रसन्नता हुई।

 

शिक्षा : - शांति और निर्भयता मे ही सच्चा सुख कुछ भी नही है।


 

02. टिड्डा और चिंटी (Short Stories in Hindi for Class 2)


मई का महिना था, बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। खेतों मे अनाज भी भरपूर था। सुबह सवेरे एक टिड्डा भरपेट खाना खाकर गीत गाने में मस्त था। उसने देखा, कुछ चींटियाँ खाने की सामग्री ले जा रही हैं।

 


शायद वे इन खाने की सामग्री को भविष्य के लिए संग्रह कर रही थीं। चींटियों को देखकर वह हँसने लगा और उनमे से एक चींटी से कहा, "तुम सभी कितनी लालची हो! इस खुशी के मौके पर भी इतनी मेहनत कर रही हो!" चींटी ने जवाब दिया, "अरे टिड्डा भाई, हम लोग बरसात के मौसम मे खाने के लिए सामग्री एकत्र कर रहे हैं।"

 


गर्मी का मौसम समाप्त हुआ और बरसात शुरू हुई। आकाश में काले काले बादल छाने लगे और खुली धूप जाती रही! खेतों मे अनाज न होने के कारण टिड्डे के लिए भोजन जुटाना बहुत मुश्किल हो गया। भूखा मरने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही बचा था। तभी उसे गर्मी के दिनों मे खाने की सामग्री एकत्र करने वाले चिंटी की याद आयी। वह तुरंत ही चिंटी के पास गया

 

 


एक दिन टिड्डे चींटी के घर गया और उसका दरवाजा खटखटाया। उसने कहा, "चींटी बहन कृपा कर मुझे कुछ खाने के लिए दो। मैं बहुत भूखा हूँ।" चींटी ने जवाब दिया, "गर्मी के दिनों में तो तुम गीत में मगन होकर इधर-उधर घूमते रहे, अब बरसात के मौसम में कही जाकर नाचो। तुम जैसे आलसी को मैं एक भी दाना नहीं दे सकती।" और उसने झट से दरवाजा बंद कर दिया।

 


शिक्षा - आज की बचत ही कल काम आती है।


 03. किसान और जादुई बतख (Story in Hindi for Class 2 with Moral)


बहुत समय पहले किसी गांव मे एक किसान रहता था। उसके पास एक जादुई बतख थी जो रोज एक सोने का अंडा देती थी।

 


किसान रोज इस सोने के अंडे को बाजार में बेच देता था। इससे उसे अच्छी आमदनी हो जाती थी। बस क्या था, थोड़े ही दिनों में किसान बहुत अमीर हो गया। उसने एक बहुत बड़ा महल बनवाया और  अपनी पत्नी तथा बच्चों के साथ आनन्द से रहने लगा। अब उसे किसी चीज की कमी नही थी।

 


बहुत दिनों तक इसी प्रकार चलता रहा। सभी खुशी से रह रहे थे। एक दिन किसान ने सोचा, ये बतख रोज एक ही अंडे देती है, यदि मैं इस बतख के शरीर से सारे अंडे एक बार ही निकाल लूँ, तो मालामाल हो जाऊँगा।

 


बस क्या था, किसान ने एक बड़ा-सा चाकू लिया और बतख का पेट चीर डाला। लेकिन बतख के पेट में से उसे एक भी अंडा नही मिला। किसान को सारी बात समझ आ गयी। उसे अपनी गलती पर बहुत दुःख हुआ। उसकी हालत पागलों जैसी हो गयी। वह पछताने लगा। जिस बतख के अंडे से वह इतना अमीर हुआ था, अब वह बतख मर चुकी थी। 

 


शिक्षा - लालच बुरी बला है।


04. बैल और मेढक (Hindi Short Stories for class 2)


एक बार की बात है किसी तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक प्यासा बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जोर से डकारा। बैल के डकारने की अवाज सुनकर सभी छोटे छोटे मेढक डर गए। वे तेजी से भागते हुए अपनी दादी माँ के पास पहुँचे।



दादी माँ ने अपने पोते से पूछा, अरे क्या हुआ? तुम लोग इतना घबराए हुए क्यों हो?

 

सबसे छोटे मेढक ने कहा, दादी जी, अभी कुछ देर पहले एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में पानी पीने के लिए आया था। उसकी आवाज बहुत ही तेज और डरावना थी।


दादी माँ ने पूछा, कितना बड़ा था वह जानवर? नन्हे मेढक ने जवाब दिया, अरे, वह तो बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने चारो पैर फैलाकर और गाल फुलाकर कहा, वह इतना बड़ा था, क्या? छोटे मेढक ने फिर कहा, अरे नही दादी वह इससे भी बहुत बड़ा था। दादी माँ दादी ने फिर गाल पेट फुलाकर और चारो पैर फैलाकर कहा इससे बड़ा तो नही होगा। है न! 

 

नन्हे मेढक नें फिर वही जवाब दिया, नही दादी वह इससे भी बहुत बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने पेट को और फुलाया। फिर क्या था उसका पेट फट गया और वह मर गई।


शिक्षा - थोथा अभिमान विनाश का कारण होता है।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 2 की 6 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 5th Moral Stories in Hindi for class 2.

 

05. बंदर का इंसाफ (Best Hindi Moral Story for Class 2)


किसी शहर मे दो बिल्लियाँ साथ रहती थीं। एक दिन दोनों को रास्ते पर एक केक दिखाई दिया। एक बिल्ली ने उछल कर तुरंत उस केक के टुकड़े को उठा लिया। दूसरी बिल्ली उससे केक छीनने लगी।


पहली बिल्ली ने कहा, अरे चल जा यहाँ से! यह केक मेरा है क्योंकि पहले मैंने इसे उठाया है।


दूसरी बिल्ली तुरंत बोली, इसे पहले मैने देखा था, इसलिए यह मेरा हुआ। दोनो लड़ते लड़ते एक पेड़ के नीचे पहुंचे। 

 

उसी पेड़ पर एक बंदर बैठा था। दोनो बिल्लियो को लड़ते देख वह नीचे उतर आया। बंदर को देखकर बिल्लियो ने उससे झगड़ा निपटाने की प्रार्थना की। 

 

बंदर भी यही चाहता था, उसने तुरंत बोला - यह केक मुझे दो। मैं इसके दो बराबर बराबर हिस्से करूँगा और तुम दोनों को एक-एक हिस्सा दे दूँगा। इस तरह तुम दोनों का झगडा समाप्त हो जायेगा।


केक मिलते ही बंदर ने उसके दो टुकड़े किये। उसने दोनो टुकडो़ को बारी-बारी से देखा, फिर अपना सिर हिलाते हुए कहा, दोनो टुकड़े बराबर नही हैं। यह टुकड़ा दूसरे टुकड़े से बड़ा है। उसने बड़े से टुकड़े से थोड़ा हिस्सा खा लिया। फिर भी दोनो हिस्से बराबर नही हुए। बंदर ने फिर बड़े हिस्से में से थोड़ा खा लिया। इस प्रकार बंदर बार बार बड़े टुकड़े में से थोड़ा-थोड़ा खाता रहा। 



फिर क्या था, अंत मे केक के केवल दो बहुत ही छोटे-छोटे टुकड़े बचे। बंदर नें बिल्लयो से कहा, ओ-हो-हो! अब भला इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हे कैसे दे सकता हूँ? चलो इसे भी मैं ही खा लेता हूँ। यह कहकर बंदर केक के दोनो छोटे-छोटे टुकड़े मुँह में डालकर चलता बना। बिल्लयो के झगड़ने के फायदा बंदर ने अच्छी तरह लिया।

 

शिक्षा - दो की लड़ाई मे तीसरे का फायदा। इसी लिए हमे आपस मे नही झगड़ना चाहिए। क्योंकि झगड़ने से कुछ हासिल नही होता। 

 

6. फल वाला और पंसारी - Moral Stories in Hindi for class 2


एक बार एक पंसारी ने एक फलवाले से उसका तराजू और बाट उधार लिए कुछ दिनो बाद फलवाले ने पंसारी से अपने तराजू और बाट वापस मागें पंसारी ने कहा, "कैसा तराजू और बाँट उन्हे तो चूहा खा गया इसलिए मुझे खेद है कि मै उन्हे लौटा नही सकता।" 


बेईमान पंसारी की बात सुनकर फल वाले को बहुत गुस्सा आया पर उसने गुस्से को दबाते हुए कहा, "कोई बात नही मित्र! इसमे तुम्हारा कोई दोष नही है मेरी तकदीर खराब है।"

उसके बाद एक दिन फलवाले ने पंसारी से कहा,"देखो! मैं कुछ समान लेने बाहर जा रहा हूँ तुम चाहो तो मेरे साथ अपने बेटे को भेज सकते हो हम लोग कल तक वापस आ जाएगें।"


पंसारी ने बेटे को फलवाने के साथ भेज दिया दूसरे दिन फलवाला लौटा तो वह अकेला था।

अरे! मेरा बेटा कहाँ है? पंसारी ने पूछा,

"क्या बताऊँ तुम्हारे बेटे को सारस उठा ले गया फलवाले ने जवाब दिया!" 


"अबे झूठे इतने बड़े लड़के को सारस कैसे उठा ले जा सकता है" पंसारी ने गुस्से से कहा, फलवाले ने जवाब दिया, "उसी तरह जैसे चूहे तराजू और बाँट खा सकते हैं।" पंसारी को अपनी भूल समझ मे आई उसने फलवाले का तराजू और बाट वापस कर दिया वह अाँसू भरी आँखो से बोला, "भाई! मैंने तुम्हारे साथ छल किया मुझे माफ कर दो और मेरा बेटा मुझे लौटा दो।" फलवाले ने पंसारी के बेटे को उसके पिता के पास लौटा दिया।


7. मुर्ख और ठग - Moral Stories in Hindi for class 2


एक गाँव में एक मूर्ख आदमी रहता था गाँव के छोटे छोटे बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे। वह लाख चतुर बनने की कोशश करता पर कोई न कोई उसे मूर्ख बनाता रहता। 


एक दिन वह अपने घोड़े और बकरी बेचने बजार जा रहा था वह घोड़े पर सवार था उसने बकरी के गले मे घंटी बाँध रखी थी रस्सी का एक हिस्सा बकरी के गले मे दूसरा हिस्सा घोड़े की पूँछ से बाँध रखा था। मूर्ख को जानने वाले कुछ ठग उसका पीछा कर रहे थे उनमे से एक ठग ने बकरी के गले से घंटी खोलकर घोड़े की पूँछ में बाँध दी इसके बाद बकरी को लेकर रफूचक्कर हो गया, घोडे़ की पूँछ पर बँधी घंटी बजती रही और मूर्ख यही समझता रहा कि बकरी उसके पीछे पीछे आ रही है थोड़ी देर बाद दूसरा ठग आया उसने मूर्ख को रोककर पूँछा, "भाई साहब आपने अपने घोड़े की पूँछ में यह घंटी क्यों बाँध रखी है।" उस मूर्ख ने पीछे मुड़कर देखा तो बकरी नदारद थी उसे बड़ा ताज्जुब हुआ।


तभी तीसरा ठग आ पहुँचा उसने मूर्ख से कहा, "मैंने अभी देखा है कि एक आदमी तुम्हारी बकरी को लिए भागा जा रहा है अगर तुम मुझे अपना घोड़ा दे दो तो मैं उसका पीछा करके तुम्हारी चुराई गई बकरी वापस ला सकता हूँ!"मूर्ख तुरंत घोड़े पर से उतर पड़ा और उसने घोड़ा तीसरे ठग के हवाले कर दिया। वह मूर्ख को चिढ़ाता हुआ घोड़े को लेकर सरपट भाग गया बेचारा मूर्ख बहुत देर तक अपने पशुओ को पाने का इंतजार करता रहा पर जब वह राह देखते देखते थक गया और ठग लौट कर नही आया तो वह खाली हाथ ही घर वापस लौट आया। 


दूर कहीं घंटी बजती रही और तीनो ठग गाते रहे, 

घंटी घंटी बजती रहो, 

रातोदिन गाती रहो, 

जीवन एक खेल है सुनहरा।


शिक्षा : - मूर्ख की तकदीर कभी लंबे समय तक उसका साथ नही देती


8. स्वार्थी दोस्त - Moral Stories in Hindi for class 2


श्याम और राम अच्छे मित्र थे। एक दिन वे जंगल से होकर जा रहे थे। रास्ते में उन्हे एक रीछ दिखाई दिया, वह उनकी तरफ आ रहा था। श्याम तुरंत भाग कर पास के पेड़ पर चढ़ गया। राम को पेड़ पर चढ़ना नही आता था। पर उसने सुना था। कि जानवर मरे हुए लोगो को कुछ नही करते। इस लिये वह स्थिर होकर जमीन पर लेट गया। उसने अपनी आँखे मूँद ली। और साँस रोक ली रीछ राम के पास आया। उसने चेहरे को सूघाँ।


उसे लगा कि वह मर चुका है। और रीछ आगे बढ गया। जब रीछ कुछ दूर चला गया। तो श्याम पेड़ से उतरा उसने राम से पूँछा, "रीछ तुम्हारे कान मे क्या कह रहा था?" राम ने जवाब दिया, "उसने कहा कि स्वार्थी लोगो से दूर रहो।"


शिक्षा - समय पर काम मे आने वाला मित्र ही सच्चा मित्र है


9. लकड़हारा और देवदुत - Hindi Stories with Moral for Class 2


एक लकड़हारा था। एक बार वह नदी के किनारे एक पेड़ से लकड़ी काट रहा था। एकाएक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर नदी मे गिर पड़ी। नदी गहरी थी। उसका प्रवाह भी तेज था। लकड़हारे ने नदी से कुल्हाड़ी निकालने की बहुत कोशिश की पर वह उसे नही मिली इससे लकड़हारा बहुत दुखी हो गया। इतने देवदूत मेवहाँ से गुजरा लकड़हारे को मुँह लटकाए खड़ा देख कर उसे दया आ गई। वह लकड़हारे के पास आया और बोला चिंता मत करो। मैं नदी से तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी निकाल देता हूँ। यह कहकर देवदूत नदी मे कूद पड़ा देवदूत पानी से निकला तो उसके हाथ मे सोने की कुल्हाड़ी थी। वह लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी देने लगा। तो लकड़हारे ने कहा,"नही नही यह कुल्हाड़ी मेरी नही है। मैं इसे नही ले सकता।"


देवदूत ने फिर नदी में डुबकी लगाई इसबार वह चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया ईमानदार लकड़हारे ने कहा, "यह कुल्हाड़ी मेरी नही है। 


देवदूत ने तीसरी बार पानी मे डुबकी लगाई इस बार वह एक साधारण सी लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आया।

हाँ यह मेरी कुल्हाड़ी है। लकड़हारे ने खुश होकर कहा।


उस गरीब की ईमानदारी देखकर देवदूत बहुत प्रसन्न हुआ। उसने लकड़हारे को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी दे दी। साथ ही उसने सोने और चाँदी की कुल्हाडि़याँ भी उसे पुरस्कार के रूप मे दे दीं।


शिक्षा - ईमानदारी से बढ़कर कोई चीज नही।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 2 की 9 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 10th Moral Stories in Hindi for class 2.


10. टोपी वाला और बंदर - Best Hindi Stories with Moral for Class 2


दो छोटे छोटे गाँव थे। दोनो गाँवो के बीच एक जंगल था। इस जंगल में बहुत सारे बंदर रहते थे। एक दिन एक टोपी वाला टोपियाँ बेचने के लिए इस जंगल से होकर जा रहा था। वह चलते चलते थक गया था। उसने अपना टोपियों से भरा संदूक एक पेड़ के नीचे रखा। और वहाँ बैठकर आराम करने लगा। थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गई। जब टोपी वाले की नींद खुली तो वह चौंक कर उठा। उसका संदूक खुला था और सारी टोपियाँ गायब थी। 


इतने में उसे बंदरो की आवाज सुनाई दी। उसने ऊपर देखा उस पेड़ पर बहुत सारे बंदर थे। सभी बंदरो ने सर पर टोपिया पहनी हुई थी। टोपीवाले को बहुत गुस्सा आया। उसने पत्थर उठा उठा कर बंदरो को मारना शुरू किया। उसकी नकल करते हुए बंदरो ने भी पेड़ से फल तोड़कर टोपीवाले की ओर फेकने शुरू किया। अब टोपीवाले को समझ में आ गया कि बंदरो से टोपियाँ कैसे वापस ले सकता है। टोपीवाले ने अपने सर से टोपी उतारी और उसे जमीन पर फेंक दी। 


नकलची बंदरो ने यह देखा तो उन्होने भी अपने सर की टोपियों को उतारकर फेंकना शुरू कर दिया। टोपीवाले ने जल्दी जल्दी टोपियाँ इकट्रठी की संदूक में रखी और खुशी खुशी दूसरे गाँव की ओर चल पड़ा।


शिक्षा - सूझबूझ से ही हम कठिनाइयों से पार पा सकते है


11. ग्वालिन और उसका सपना - Best Hindi Stories with Moral for Class 2


एक ग्वालिन थी। वह दूध बेचने जा रही थी। उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था। चलते चलते मन ही मन विचार कर रही थी। इस दूध को बेचने से जो पैसा मिलेगा। उन पैसो से मैं अंडे खरीदूँगी उन अंडो से मुझे अनेक अच्छी अच्छी मुर्गियाँ मिलेगीं उन मुर्गियों को बेच कर मैं अपने लिए रेशमी साड़ी खरीदूंगी। उस रेशमी साड़ी मे मैं बहुत सुंदर दिखाई दूँगी फिर अच्छे अच्छे लड़के मेरे पास आएग। मुझसे शादी करना चाहेंगे। पर मैं इनकार में अपना सर झटकर कहूँगी नही।


यह सोचते हुए उसने अपने सर को जोर से झटका दिया। इसके करण उसके सरपर रखा दूध का घड़ा जमीन पर गिर गया। उसका सारा दूध जमीन पर फैल कर बर्बाद हो गया। इस तरह अंड़ो मुर्गियों रेशमी साड़ी तथा अच्छे अच्छे लड़को का ग्वालिन का सपना मिट्टी में मिल गया।


शिक्षा - हवा में महल बनाना अच्छा नही!


12. काजू खाने वाला लड़का - Best Moral Stories in Hindi for class 2


एक लड़का था। उसे काजू बहुत पसंद थे। इसलिए उसकी माँ उसे थोड़े थोड़े काजू खाने के लिए देती थी। लड़का हमेशा माँ से ज्यादा काजू देने का हठ करता पर उसकी माँ उसे हर बार कहती नही बेटे एक साथ ज्यादा काजू नही खाने चाहिए। यदि एक साथ ज्यादा काजू खाओगे। तो तुम्हारे पेट में दर्द होने लगेगा। यह सुनकर लड़का चुप हो जाता पर उसने माँ की बात पर कभी ध्यान नही दिया।


एक दिन उसकी माँ बाहर गई हुई थी। लड़का घर पर अकेला था।


उसने जल्दी जल्दी काजू का डिब्बा उतारा उस दिन घर पर उसे रोकने वाला कोई नही था। उसने भर पेट काजू खाए। 


दूसरे दिन लड़का बीमार पड़ गया। उसके पेट में जोरो की पीड़ा होने लगी। उसे इस बात का बड़ा पछतावा हुआ कि उसने माँ का कहना नही माना।


शिक्षा - माता पिता तुम्हारे शुभचिंतक है। उनका कहना मानो।


13. भेड़िया और भेड़ - Hindi Stories with Moral for Class 2


एक भेड़ चरानेवाला लड़का था। वह रोज भेड़ों को चराने के लिए जंगल में ले जाता था। जंगल में वह अकेला होता था। इसलिए उसका मन नही लगता था। एक दिन उसे मजाक करने की सूझी।


वह जोर जोर से चिल्लाने लगा, "बचाओ बचाओ भेडि़या आया भेडि़या आया।"


आसपास के खेतो में किसान काम कर रहे थे। उन्होने लड़के की आवाज सुनी वे अपना अपना काम छोड़कर लड़के की मदद के लिए दौड़ पड़े। जब लड़के के पास पहुचे तो उन्हे कही भेडि़या दिखाई नही दिया। किसानो ने लड़के से पूछा, "भेडि़या तो कहीं है नही फिर तुमने हमे क्यों बुलाया?",


लड़का हँसने लगा उसने कहा, "मैं तो मजाक कर रहा था। भेडि़या आया ही नही था। जाओ जाओ तुम लोग।"


किसानो ने लड़के को खूब डाटा फटकारा इसके बाद वे लौट गए।


एक बार लडके ने फिर ऐसा ही मजाक किया आसपास के किसान मदद के लिए दौड़ आए। लड़के के इस मजाक पर उन्हे बहुत गुस्सा आया लड़के को डाँट फटकार कर चले गए।


कुछ समय बाद एक दिन सचमुच भेडि़या आ पहुँचा भेड़ चरानेवाला लड़का दौडकर पेड़ पर चढ़ गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा।


पर इस बार उसकी मदद के लिए कोई नही आया सभी ने यही सोचा कि वह बदमाश लड़का पहले तरह मजाक कर रहा है।


भेडि़ए ने कई भेड़ो को मार डाला इससे लड़के को अपने किए पर बड़ा दुख हुआ।


शिक्षा - झूठे आदमी की सच्ची बातो पर भी लोग विश्वास नही करते।


दोस्तों अभी तक आप Best Moral Stories in Hindi for Class 2 की 13 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 24th Moral Stories in Hindi for class 2.


14. बुढ़िया और उसका नौकर - Moral Stories in Hindi for class 2


एक बुढि़या थी। उसके यहाँ दो नौकर थे। बुढि़या रोज सुबह मुर्गे के बाॅग देते ही उठ जाती थी। फिर वह अपने नौकरौ को जगाती और उन्हे काम पर लगा देती।


नौकरो को सुबह इतनी जल्दी उठना पसंद नही था। वे दोनो हमेशा यही सोचा करते ऐसा कोई उपाय करना चाहिये। ताकि हम आराम से सो सके। 


एक दिन एक नौकर ने कहा, 'क्यो न हम सभी मुर्गो को मार डाले। न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी यदि मालकिन सुबह मुर्गे की बाॅग नही सुनेगी तो जल्दी उठेगी कैसे। यदि वह सुबह जल्दी जाँगेगी नही तो हमें नींद से कौन उठाएगा। फिर हम चैन की नीद सो सकेगे।" दूसरे नौकर को यह बात पसंद आ गई। दूसरे दिन दोनो नौकरो ने मिलकर मुर्गे को मार डाला। जब मुर्गा ही नही रहा तो बड़े सबेरे बाँग कौन देता? अब बुढि़या को सुबह उठने का समय नही पता चलता था। इसलिए वह पहले की अपेक्षा और जल्दी उठ जाती थी।


एक बार वह जग जाती तो नौकरो को भी सोने न देती। मुर्गा तो मर गया पर नौकरो की परेशानी पहले से ज्यादा बढ़ गई।


अब उन्हे और भी जल्दी उठना पडता था।


शिक्षा - बिना बिचारे जो करे सो पीछे पछताए।


15. मछुवा और मंत्री - Moral Stories in Hindi for class 2


एक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ समुद्र में मछली मारने नही गया। इसलिए राजा को तुरंत पकड़ी हुई मछली नही मिल सकी। राजा ने घोषणा करा दी। कि उस दिन जो भी तुरंत पकड़ी हुई मछली राजा के पास लाएगा। उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा। एक गरीब मछुए ने यह घोषणा सुनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछलियाँ पकड़ी और राजमहल पहुँचा राजमहल के पहरेदारो ने उसे फाटक पर रोक दिया वे उसे राजा के मंत्री के पास ले गए।


मंत्री ने मछुए से कहा, "मैं तुम्हे राजा के पास जरूर जाने दूँगा पर तुम्हे राजा से जो ईनाम मिलेगा। उस में आधा हिस्सा होगा।" मछुए को मंत्री का यह प्रस्ताव पसंद नही आया। फिर भी उसने मन मारकर उसे स्वीकार किया।


इसके बाद पहरेदार उसे लेकर राजा के पास गए। मछुए ने राजा को मछलियाँ दी। राजा मछुए पर बहुत प्रसन्न हुआ। बताओ क्या इनाम चाहिए। तुम जो माँगोगे वह मैं तुम्हे अवश्य दूँगा। मछुए ने कहा, "महाराज मैं चाहता हूँ मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ। बस मुझे यही इनाम चाहिए।" मछुए की यह बात सुनकर सभी दरबारी चकित रहगए। राजा ने मछुए की पीठ पर पचास हल्के कोड़े लगाने का आदेश दिया जब नौकर मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा चुका। तो मछुए ने कहा, "रूको! अब बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार की पीठ पर लगाओ।" राजा ने मछुए से कहा, "तुम्हारा हिस्सेदार कौन है?"


मछुए ने कहा,"महाराज आपके मंत्री महोदय ही मेरे हिस्सेदार है।"


मछुए का जवाब सुनकर राजा गुस्से से तमतमा उठा। उसने मंत्री को अपने सामने हाजिर करने का आदेश दिया।


मंत्री के सामने आते ही राजा ने नौकर को आदेश दिया इन्हे गिनकर पच्चीस कोड़े लगाओ ध्यान रखो। इनकी पीठ पर कोड़े जोर जोर से लगने चाहिए। इसके बाद राजा ने बेईमान मंत्री को जेल मे डाल दिया। फिर राजा ने मछुए को मुँहमाँगा इनाम दिया।


शिक्षा - जैसी करनी वैसी भरनी।


16. गधा और मूर्तिकार - Best Moral Stories in Hindi for class 2


एक गाँव मे एक मूर्तिकार रहता था। वह देवी देवी देवताओ की सुन्दर मूर्तिया गढ़ा करता था। एक बार उसने भगवान की एक बहुत सुंदर मूर्ति गढ़ी। वह मूर्ति उसे ग्राहक के पास पहुचानी थी। इसलिए उसने कुम्हार से गधा किराए पर लिया। फिर उसने मूर्ति गधे पर लादी और चल पड़ा रास्ते मे जो उस मूर्ति को जो देखता पल भर रूककर मूर्ति की तारीफ जरूर करता। कुछ लोग उस मूर्ति को देखते ही झुककर प्रणाम करते।


यह देख कर उस मूर्ख गधे ने सोचा कि लोग उसी की प्रशंसा कर रहे हैं। और उसी को झुककर प्रणाम कर रहे है वह अकड़कर सड़क के बीच खड़ा हो गया। और जोर जोर से रेंकने लगा। मूतिकार ने गधे को पुचकार कर चुप करने की।


बहुत कोशिश की। पर गधा रेकंता ही रहा। अंत मे उस मूर्तिकार ने डंडे से उसकी खूब पिटाई की। मार खाने के बाद गधे का सारा घंमड उतर गया। उसका होश ठिकाने आया। और वह फिर चुपचाप चलने लगा।


शिक्षा - समझदार के लिए इशारा और मूर्खो के लिए डंडा


17. गरीब मजदूर - Best Moral Stories in Hindi for class 2


एक गरीब मजदूर था। वह खेतो में काम करता था एक दिन शााम को वह अपना काम खत्म करके। घर लौट रहा था रास्ते के किनारे मिठाई की एक दुकान थी। मिठाईयो की मीठी मीठी सुगंध रास्ते भर आ रही थी। इससे मजदूर के मुह में पानी आ गया। वह दुकान के पास गया। कुछ देर वहाँ खड़ा रहा उसके पास थोड़े पैसे थे। पर वे मिठाई खरीदने के लिये काफी नही थे। वह खाली हाथ लौटने लगा तभी उसे दुकनदार की कर्कश आवाज सुनाई दी। "रूको! पैसे तो देते जाओ।" 


पैसे ? काहे के पैसे? मजदूर ने पूछा?

मिठाई के और काहे के! दुकनदार ने कहा,

"पर मैने तो मिठाई खाई नही! उसने जवाब दिया।

"लेकिन तुमने मिठाई की सुगंध तो ली है न!" दुकनदार ने कहा, "सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है।"


बेचारा मजदूर घबरा गया। वहाँ खड़ा एक होशियार आदमी यह सुन रहा था। उसने मजदूर को अपने पास बुलाया उसके कान में फुसफुसाकर कुछ कहा। उस आदमी की बात सुनकर मजदूर का चेहरा खिल उठा वह दुकनदार के पास गया और अपनी जेब के पैसे खनखनाने लगा पैसो की खनखनाहट सुनकर दुकनदार खुश हो गया। चलो निकालो पैसे। मजदूर ने कहा, "पैसे तो मैने चुकता कर दिए" 

दुकनदार ने कहा, "अरे तुमने पैसे कब दिए?"


मजदूर ने कहा, "तुमने पैसो की खनखनाहट नही सुनी अगर मिठाई की सुगंध लेना मिठाई खाने के बराबर है। तो पैसो की खनखनाहट सुनना पैसे लेने के बराबर है।" हा हा हा वह गर्व से सर ऊँचा किए कुछ देर वहाँ खड़ा रहा। फिर मुस्कराता हुआ चला गया।


शिक्षा - जैसे को तैसा


18. डब्बू और नाई - Moral Stories for class 2 in Hindi


डब्बू नाम का एक छोटा लड़का था। वह हमेशा होशियारी दिखाता था। 


एक दिन उसे नाई से मजाक करने की सूझी वह सुबह सुबह नाई

की दुकान में पहुँचा। शाीशे के सामने कुर्सी पर बैठ गया नाई ने पूछा, "क्या बात है डब्बू?" डब्बू ने शान से कहा, "जरा मेरी दाढ़ी बना दो।"


नाई को डब्बू की शैतानी समझ में आ गई। उसने कहा, "हाँ जरूर बनाऊँगा। सरकार इसके बाद नाई ने डब्बू के कंधो पर तौलिया लपेट दिया। उसने ब्रश से उसके चेहरे पर झागदार साबुन लगाया फिर वह अपने अन्य काम में लग गया।


डब्बू ने कुछ देर तक इतंजार किया चेहरे पर साबुन पोते ज्यादा देर तक बैठे रहना। उसके लिए मुश्किल हो गया उसने नाई पर नाराज होते हुए कहा आखिर तुमने मुझे इस तरह क्यों बिठा रखा है।


यह सुनकर नाई हँस पड़ा। उसने शांति से जवाब दिया इसलिए कि अभी में तुम्हारी दाढ़ी उगने का इंतजार कर रहा हूँ। 


शिक्षा - दूसरे का मजाक उडानेवाला खुद मजाक का पात्र हो जाता है।


दोस्तों अभी तक आप Best Moral Short Stories for Class 2 in Hindi की 18 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 19th Moral Stories in Hindi for class 2.


19. गधे की परछाई - Moral Stories in Hindi for class 2


गर्मियो के दिन थे। तेज धूप में एक यात्री को एक गाँव से दूसरे गाँव जाना था। दोनो गाँव के बीच एक निर्जन मैदान था यात्री ने किराए पर एक गधा ले लिया। गधा आलसी था। वह चलते चलते बार बार रूक जाता था। इसलिए गधे का मालिक उसके पीछे पीछे चल रहा था। जब गधा रूकता तो वह उसे डंडा मारता गधा फिर आगे चलने लगता था।


चलते चलते दोपहर हो गई। आराम करने के लिए वे रास्ते में रूक गए वहाँ आस पास कोई छाया नही थी। इसलिए यात्री गधे की परछाई मे बैठ गया। 


गर्मी के कारण गधे का मालिक भी बहुत थक गया था। वह भी गधे की परछाई में बैठना चाहता था। इसलिए उसने यात्री से कहा, "देखो भाई यह गधा मेरा है। इसलिए गधे की परछाई मेरी है। तुमने केवल गधे को किराए पर लिया है उसकी परछाई से हमारा कोई सौदा नही हुआ है। इसलिए मुझे गधे की परछाई में बैठने दो।"


यात्री ने कहा, "मैंने पूरे दिन के लिए गधे को किराए पर लिया है।


इसलिए पूरे दिन गधे की परछाई का उपयोग करने का भी मेरा ही अधिकार है। तुम गधे से उसकी परछाई को अलग नही कर सकते" 

दोनो आदमी आपस में झगड़ने लगे फिर उनमे मारपीट शुरू हो गई।

इतने में गधा भााग खड़ा हुआ। वह अपने साथ अपनी परछाई भी ले गया।


शिक्षा - छोटी छोटी बातो पर लड़ना अच्छा नही।


20. बादाम किसे मिले - Short Stories in Hindi for Class 2


एक दिन दो लड़के सड़क के किनारे किनारे जा रहे थे। तभी उन्हे जमीन पर गिरा हुआ एक बादाम दिखाई दिया। दोनो उस बादाम को लेने के लिए दौड़ पड़े। बादाम उनमे से एक लड़के के हाथ लगा। दूसरे लड़के ने कहा, "यह बादाम मेरा है। क्योंकि सबसे पहले मैने इसे देखा था।"


यह मेरा है। बादाम लेनेवाले लड़के ने कहा, "क्योंकी मैंने इसे उठाया था।" इतने मे वहाँ एक चलाक लंबा सा लड़का आ पहुँचा। 


उसने दोनो लड़को से कहा, "बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनो का झगड़ा निपटा देता हूँ।" लंबे लड़के ने बादाम ले लिया उसने बदाम को फोड़ डाला। उसके कठोर छिलके के दो टुकड़े कर दिये। छिलके का आधा हिस्सा एक लड़के को देकर उसने कहा, "लो यह आधा भाग तुम्हारा दूसरा भाग दूसरे लड़के के हाथ मे थमाकर बोला और यह भाग तुम्हारा। फिर लंबे लड़के ने बादाम की गिरी मुहँ मे डालते हुए कहा, "यह बाकी बचा हिस्सा मैं खा लेता हूँ। क्योंकी तुम्हारा झगड़ा निपटाने मे मैंने मदद की है।


शिक्षा - दो के झगड़े मे तीसरे का फायदा।


21. मूर्खता का फल - Moral Stories in Hindi For Class 2


एक बढ़ई था। एक बार वह लकड़ी के लंबे लट्ठे को आरे से चीर रहा था। उसे इस लट्ठे के दो टुकडे़ करने थे। सामनेवाले पेड़ पर एक बंदर बैठा हुआ था। वह काफी देर से बढ़ई के काम को बडे़, ध्यान से देख रहा था। बढ़ई ने दोपहर का भोजन करने के लिये काम बंद कर दिया। अब तक लट्ठे का केवल आधा ही भाग चीरा जा चुका था। इसलिए उसने लट्ठे के चिरे हुए हिस्से में एक मोटी सी गुल्ली फँसा दी। इसके बाद वह खाना खाने चला गया।


बढ़ई के जाने के बाद बंदर पेड़ से कूदकर नीचे आया। वह कुछ देर तक इधर-उधर देखता रहा। उसकी नजर लकड़ी की गुल्ली पर गड़ी हुई थी। वह गुल्ली के पास गया और उसे बड़ी उत्सुकता से देखने लगा। वह अपने दोनों पाँव लट्ठे के दोनों ओर लटकाकर उस पर बैठ गया। इस तरह बैठने से उसकी लंबी पूँछ लकडी के चिरे हुए हिस्से में लटक रही थी। उसने बड़ी उत्सुकता से गुल्ली को हिलाडुला कर देखा फिर वह उसे जोर-जोर से हिलाने लगा। अंत में जोर लगा कर उसने गुल्ली खींच निकाली। 


ज्योंही गुल्ली निकली की लट्ठे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस में चिपक गये। बंदर की पूँछ उसमे बुरी तरह से फंस गयी। दर्द के मारे बंदर जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसे बढ़ई का डर भी सता रहा था। वह पूँछ निकालने के लिए छटपटाने लगा। उसने जोर लगाकर उछलने की कोशिश की, तो उसकी पूँछ टूट गयी। अब वह बिना पूँछ का हो गया।


शिक्षा - अनजानी चीजो से छेड़छाड़ करना खतरनाक होता है।


दोस्तों अभी तक आप Short Stories for Class 2 with Moral in Hindi की 21 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 22th Moral Stories in Hindi for class 2.


22. माँ का प्यार - Hindi Stories with Moral for Class 2


एक परी थी। एक बार उसने घोषणा की,”जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा, उसे मैं इनाम दूँगी।“ 


यह सुनकर सभी प्राणी अपने-अपने बच्चों के साथ एक स्थान पर जमा हो गए। परी ने एक-एक करके सभी बच्चों को ध्यान से देखा। जब उसने बंदरिया के चपटी नाकवाले बच्चे को देखा, तो वह बोल उठी,” छिः! कितना कुरूप है यह बच्चा! इसके माता-पिता को तो कभी पुरस्कार नही मिल सकता।“ 


परी की यह बात सुनकर बच्चे के माँ के दिल को बहुत ठेस लगी। उसने अपने बच्चे को हदय से लगा लिया और उसके कान के समीप अपना मुँह ले जाकर कहा,”तू चिंता न कर मेरे लाल! मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ। मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।“


शिक्षा - दुनिया की कोई चीज़ माँ के प्यार की बराबरी नहीं !

 

दोस्तों यह थी top 22 Moral Stories in Hindi for class 2. ये सभी कहानियाँ नैतिक है। और इन कहानियों से बच्चों को बहुत मदद मिलेगी।

 

आप को ये top 22 Hindi moral story for class 2 कैसी लगी हमे comment मे जरूर बताएं। अगर आप को ये कहानियाँ अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करें। 

 

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