23+ Best Animal Stories in Hindi with Moral | जानवरों की हिंदी नैतिक कहानियां

23 Best Animal Stories in Hindi with Moral | जानवरों की हिंदी नैतिक कहानियां

 
Animal Stories in Hindi with Moral: Hello friends, how are you? Today I am sharing the top 23 animal stories in Hindi for kids. These short animal stories in Hindi are very valuable and give very good morals.

आज के इस आर्टिकल मे, मै आप के साथ best 23 animal short stories in hindi with moral share कर रहा हूँ। ये हिंदी नैतिक कहानियाँ बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। ये सभी कहानियों के अंत मे नैतिक शिक्षा दी गयी हैं। जो बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने मे बहुत मदद करेगी।

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आईये इन top 23 animal stories in hindi को पढ़ते हैं।

Top 23 Short Animals Stories in Hindi | जानवरों की हिंदी नैतिक कहानियां

Best Animal Stories in Hindi with Moral


1. लोमड़ी और सारस - Best Animal Stories in Hindi


एक सारस की एक लोमड़ी से मित्रता हो गई। एक बार लोमड़ी ने सारस को भोजन का निमंत्रण दिया। उसने सूप (रसा) तैयार किया और उसे दो सपाट तश्तरियों में परोस दिया। 

                 चलो, खाने की शुरूआत करें। लोमड़ी ने सारस से कहा और सूप चाटना शुरू कर दिया। बड़ा मजेदार है। है न! सूप चाटते-चाटते वह बोली। 

                सारस ने सूप की सुगंध ली। उसके मुँह में पानी आ गया। पर सूप की एक बूंद भी उसके मुँह तक नहीं पहुँची उसकी चोंच लंबी थी और तश्तरी सपाट थी। उसे पता चल गया कि धूर्त लोमड़ी उसके साथ मजाक कर रही है। लेकिन सारस चुप रहा। वह देखता रहा लोमड़ी सूप चट कर गई।

               कुछ दिनों के बाद सारस ने लोमड़ी को भोजन का निमंत्रण दिया। वह लोमड़ी को अपने यहाँ ले गया। उसने भी स्वादिष्ट सूप बनाया। सँकरे मुँहवाली दो सुराहियों में सूप परोसकर सारस ने कहा-

चलो, शुरू करें खाना। उसने अपनी लंबी चोच सुराही में डाल दी। सारस आराम से सूप पी रहा था। सूप पीते-पीते उसने लोमड़ी से कहा, मैंने इतना स्वादिष्ट सूप कभी नही चखा था। इसे मैंने विशेष रूप से तुम्हारे लिए बनाया है। शर्म मत करो, जी भर कर खाओ।

               पर लोमड़ी सूप का जरा भी स्वाद नहीं ले पाई। सुराही का गला बहुत तंग था। सूप तक उसका मुँह पहुँच ही नहीं पाया। उसे बडा दुःख हुआ।

लोमड़ी समझ गई की उसने सारस के साथ जो शरारत की थी, उसी का यह फल उसे भुगतना पड़ रहा है।

शिक्षा - जैसे को तैसा

2. चूहा और बैल - Animal Stories in Hindi with Moral


                           एक नन्हा-सा चूहा था। वह अपने बिल से बाहर आया। उसने देखा कि एक बड़ा बैल पेड़ की छाया में सोया हुआ है। बैल जोर-जोर से खर्राटें भर रहा था। चूहा बैल की नाक के पास गया और मजा लेने के लिए उसने उसकी नाक में काट लिया।

                           बैल हड़बड़ा कर जाग गया। दर्द के मारे वह जोर से डकारा। इससे घबरा कर चूहा सरपट भागा। बैल ने पूरी ताकत से उसका पीछा किया। चूहा दौडकर झटपट दीवार के छेद में घुस गया। अब वह बैल की पहुँच से बाहर था।

                         पर बैल ने चूहे को सजा देने की ठान ली थी। उसने गुस्से से चिल्लाकर कहा, "अबे नालायक! मैं तुझे एक ताकतवर बैल को काटने का मजा चखाऊँगा।" बैल ताकतवर था। उसने अपने सिर से दीवार पर जोर से धक्का मारा। पर दीवार भी बहुत मजबूत थी। उस पर कोई असर नही हुआ, बल्कि बैल के सिर में ही चोट लगी। 

यह देख कर चूहे ने बैल को चिढ़ाते हुए कहा, "अरे मूर्ख, बिना मतलब अपना सिर क्यों फोड़ रहा है? तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे मन की तो नहीं हो सकती।"

                         बैल अब भी चूहे को बिना दंड दिए छोड़ देने को तैयार नहीं था। चूहे जैसे एक तुच्छ प्राणी ने उसका अपमान किया था। इस समय वह बहुत क्रोध में था। 

पर धीरे-धीरे उसका जोश कम हुआ। उसे चूहे की बात सही मालूम हुई। इसलिए वह चुपचाप वहाँ से चला गया।

                       चूहे के ये शब्द अब भी उसके कान में गूँज रहे थे तू कितना ही बलवान क्यों न हो, पर हमेशा तेरे ही मन की तो नहीं हो सकती।

शिक्षा -बुद्धि शक्ति से बड़ी होती है।

3. दो मेढक - Best Animal Stories in Hindi


                    एक बार दो मेढ़क दूध से भरे एक मटके में गिर गए। मटके से बाहर आने के लिये वे दूध में गोल गोल तैरने लगे। मगर उनके पैरो को कोई ठोस आधार नही मिल रहा था। इस लिये छलांग लगाकर बाहर आना उनके मुश्किल हो गया। कुछ देर बाद एक मेढ़क ने दूसरे से कहा, "मै बहुत थक गया हूॅ। 

                  अब मै ज्यादा तैर नही सकता!" वह हिम्मत हार गया। उसने मटके से बाहर निकलने की कोशिश छोड़ दी। इसलिए वह मटके के दूध मे डूब कर मर गया।

दूसरे मेढ़क ने सोचा, "मै अपनी कोशिश नही छोडूगा। मैं तब तक तैरता रहूँगा जब तक कोई रास्ता नही निकल आता" वह तैरता ही रहा इस प्रकार उसके लगातार तैरने से दूध मठ उठा और उसके ऊपर माखन जमा हो गया

                 कुछ देर बाद मेढ़क ने माखन के गोल पर चढकर जोर की छलांग लगाई वह मटके के बाहर आ गिरा।

शिक्षा -ईश्वर उसी की मदद करता है जो स्वयं अपनी मदद करता है

4. कुत्ते की आदत छूटी - Animal Stories in Hindi


                 एक बार दो गायें चारा खाने के लिए गौशाला गईं। वहाँ पहुँचने पर अपनी नाँद में उन्हें एक कुत्ता बैठा हुआ दिखाई दिया। गायों को देखकर कुत्ता जोर-जोर से भौंकने लगा। उसे लगा कि भौंकने से गायें डरकर भाग जाएँगी। 

                उनमें से एक गाय ने कुत्ते से कहा, "देखो भाई, हमें भूख लगी है। हमें घास खा लेने दो। यह हमारा भोजन है। गाय की बातें सुनकर कुत्ता चिढ़ गया। वह और जोर-जोर से भौंकने लगा। बेचारी गायें वापस लौट आईं।

                बाद में एक गाय जाकर एक बैल को बुला लाई। बैल ने कुत्ते से कहा, "अरे भाई, तू तो घास खाता नहीं! यह गायों का चारा है। तू यहाँ से चला जा।"

पर बैल की बात का कुत्ते पर कोई असर नहीं पड़ा। वह जमकर वहीं डटा रहा। यह देखकर बैल को गुस्सा आ गया। वह जोर-जोर डकारने लगा। अपने सींग तानकर वह कुत्ते पर वार करने के लिये तैयार हो गया। कुत्ते ने देखा कि बैल गुस्से में है। इसलिए वह तुरंत दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।

शिक्षा - दूसरे की चीज पर अधिकार जताना अच्छा नही।

5. बाघ की बन आई - Top Animal Stories in Hindi


                   एक जंगल मे चार गायें रहती थी। उनमें गाढ़ी मित्रता थी। वे चारों हमेशा साथ-साथ रहती थीं। एक साथ घूमने जाती साथ-साथ चरने जातीं। वे बड़े सुख से रहती थीं। कभी कोई जंगली जानवर उन पर हमला करता, तो वे चारों मिलकर उसका सामना करतीं। और उसे मारकर भगा देतीं।

                   उसी जंगल में एक बाघ भी रहता था। उसकी नजर इन गायों पर थी वह गायों को मार कर खा जाना चाहता था। लेकिन उनकी एकता देखकर उन पर हमला करने की उसकी हिम्मत नही होती थी।
                    एक दिन गायों में आपस में झगड़ा हो गया। वे एक-दूसरे से नाराज हो गईं। उस दिन हर गाय अलग-अलग रास्ते से जंगल में चरनें गई। बाघ तो बहुत दिनों से इसी ताक में बैठा था। उसने एक-एक कर सभी गायों को मार डाला और उन्हे खा गया।

शिक्षा - एकता में ही शक्ति है, फूट से ही विनाश होता है।

6. नकलची कौवा - New Animal Stories with Moral


                     एक पहाड़ की ऊँची चोटी पर गरूड़ रहता था। पहाड़ की तलहटी में एक बड़ा पेड़ था। पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। एक दिन तलहटी में कुछ भेंडे़ घास चर रही थीं। गरूड़ की नजर एक मेमने पर पड़ी। वह पहाड़ की चोटी से उड़ा। तलहटी में आकर मेमने पर झपट्टा मारा। उसे चंगुल में लेकर उड़ते हुए वह फिर घोंसले में लौट गया। 

गरूड़ का यह पराक्रम देखकर कौए को भी जोश आ गया। उसने सोचा, "यदि गरूड़ ऐसा पराक्रम कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता?"

                    दूसरे दिन कौए ने भी एक मेमने को तलहटी में चरते हुए देखा। उसने भी उड़ान भरी और आसमान में जितना ऊपर तक जा सकता था, उड़ता चला गया। फिर उसने मेमने को पकड़ने के लिए गरूड़ की तरह जोर से झपट्टा मारा। मगर मेमने तक पहुँचने की बजाय वह एक चट्टान से जा टकराया। उसका सिर फूट गया, चोंच टूट गई और उसके प्राण-पखेरू उड़ गए।

शिक्षा - बिना सोचे-समझे किसी की नकल करने से बुरा हाल होता है।

7. मुर्ख शेर - Jungle Animal Stories in Hindi


                      एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन उसे बहुत भूख लगी। वह गुफा से बाहर आया और किसी जानवर की तलाश करने लगा। उसे दूर एक पेड़ के नीचे खरगोश दिखाई दिया। वह पेड़ की छाया में मजे से खेल रहा था। शेर खरगोश को पकडने के लिये आगे बढ़ा। खरगोश ने शेर को अपनी ओर आते हुए देखा, तो वह जान बचाने के लिये भागने लगा। 

                      शेर ने उसका पीछा किया और लपककर उसे धर दबोचा। शेर ने ज्योंही खरगोश को मारने के लिए पंजा उठाया कि उसकी निगाह हिरन पर पड़ी। उसने सोचा कि इस नन्हे खरगोश से मेरा पेट भर नही सकता। इससे तो हिरन ही अच्छा रहेगा। शेर ने खरगोश को छोड़ दिया। वह हिरन का पीछा करने लगा। हिरन ने शेर को देखा, तो जोर-जोर से छलाँग लगाता हुआ भाग खड़ा हुआ।

शेर हिरन को नही पकड़ सका। उसके पीछे भागते-भागते शेर थक कर चूर हो गया। अंत में उसने हिरन का पीछा करना छोड़ दिया। खरगोश भी हाथ से गया और हिरन भी उसे नहीं मिला। अब शेर खरगोश को छोड़ देने के लिये पछताने लगा।

शिक्षा - आधी छोड़ सारी को धाए, आधी रहे न सारी पाए।

8. स्वार्थी चमगादड़  - Short Animal Stories in Hindi


                     बहुत पुरानी बात है। एक बार पशुओं और पक्षियों में झगड़ा हो गया। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की भाँति उड़ते हैं, इसलिए पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। मगर पक्षियों की तरह हमारे पंख नही होते हम अंडे़ भी नही देते। इसलिए हम पशु दल में भी शामिल हो सकते हैं। हम पक्षी भी हैं और पशु भी हैं। इसलिए दोनों में से जो पक्ष जीतेगा, उसी में हम मिल जाँएगे। अभी तो हम इस बात का इंतजार करें कि इनमे से कौन जीतता है।

                     पशुओं और पक्षियों में युद्ध शुरू हुआ। एक बार तो ऐसा लगा कि पशु जीत जाएँगे चमगादड़ों ने सोचा, अब शामिल होने का सही वक्त आ गया है। वे पशुओं के दल में शामिल हो गए। कुछ समय बाद पक्षी-दल जीतने लगा। चमगादड़ों को इससे बड़ा दुःख हुआ। अब वे पशुओं को छोड़कर पक्षी-दल में शामिल हो गए।

                    अंत में युद्ध खत्म हुआ। पशुओं और पक्षियों ने आपस में संधि कर ली। वे एक-दूसरे के दोस्त बन गए। दोनों ने चमगादड़ों का बहिष्कार कर दिया। स्वार्थी चमगादड़ अकेले पड़ गए। 
तब चमगादड़ वहाँ से दूर चले गए और अंधेरे कोटरों में छुप गए। तब से वे अंधेरे कोटरो में ही रहते हैं। केवल शाम के धुँधले में ही वे बाहर निकलते हैं। इस समय पक्षी अपने घोंसलों में लौट आते हैं और जंगली जानवर रात में ही अपनी गुफा से बाहर निकलते हैं।

शिक्षा - स्वार्थी मित्र किसी को अच्छा नहीं लगता।

9. मुर्ख गधा - Top Animal Stories in Hindi 


                     एक कुम्हार था। उसने एक कुत्ता और एक गधा पाल रखा था। कुम्हार के मकान के चारों ओर पत्थर की चहारदीवारी थी। कुत्ता रोज चहारदीवारी के अंदर उसके घर और मिट्टी के बर्तनों की रखवाली करता था। गधा अपने मालिक का वजनदार बोझ ढ़ोने का काम करता। 

                     गधा कुत्ते से ईष्र्या करता था। वह मन-ही-मन सोचता, "कुत्ते का जीवन कितने आराम का है! केवल चहारदीवारी के भीतर इघर-उधर घूमना और किसी अजनबी को देखकर भौंकना।" ऊपर से मालिक उसे प्यार से थपथपाता है। उसे अच्छा खाना खिलाता है। मैं दिन भर भारी बोझ ढ़ोता फिरता हूँ। बदले में कुम्हार मुझे क्या देता है? वह मेरी पीठ पर डंडे लगाता है और खाने के लिये बचा-खुचा घटिया खाना देता है। यह तो वास्तव में घोर अन्याय है।"

                     कुछ दिन बाद गधे को विचार आया, "क्यों न मैं भी मालिक को कुत्ते की तरह खुश करने की कोशिश करूँ? मालिक घर लौटता है, तो कुत्ता उसे खुश करने के लिये कितने प्यार से भौंकता है। पूँछ हिलाते हुए उसके पास पहुँचता है। अपने अगले पैर उठाकर उसके शरीर पर रखता है। मुझे भी इसी तरह करना चाहिए। फिर मालिक मुझे भी प्यार करेगा।"

गधा मन-ही-मन सोच रहा था कि उसी समय उसने मालिक को आते हुए देखा। उसके स्वागत में गधा ढींचू-ढींचू करते रेंकने लगा, खुशी से अपनी पूँछ हिलाने लगा। आगे बढ़कर उसने अपने दोनो पैर कुम्हार की जाँघो पर रख दिए।

                   गधे की इस हरकत से कुम्हार हक्का बक्का रह गया। उसे लगा की गधा पागल हो गया है। उसने मोटा-सा डंडा उठाया और गधे की खूब पिटाई की।

बेचारे गधे ने अपने मालिक को खुश करने की कोशिश की थी, पर बदले में उसे डंडे खाने पडे़।

शिक्षा - किसी से ईष्र्या नहीं करनी चाहिए।

10. भेड़िया और सारस - Best Animal Stories in Hindi


                  एक लालची भेडया था। एक दिन वह खूब जल्दी-जल्दी भोजन कर रहा था। भोजन करते-करते उसके गले में एक हड्डी अटक गई। भेडि़ए ने हड्डी बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, पर वह हड्डी नही निकाल सका। 

                  वह विचार करने लगा, "अगर हड्डी मेरे गले से बाहर न निकली, तो बहुत मुश्किल होगी। मैं खा पी नहीं सकूँगा और भूख-प्यास से मर जाऊँगा।"

                  नदी के किनारे एक सारस रहता था। भेडि़या भागता-भागता सारस के पास पहुँचा। उसने सारस से कहा, "सारस भाई मेरे गले में एक हड्डी फँस गई है। आपकी गर्दन लंबी है। वह हड्डी तक पहुँच जाएगी। कृपा करके मेरे गले में फँसी हड्डी निकाल दो मैं तुम्हें अच्छा-सा इनाम दूँगा।" 

                   सारस ने कहा, ठीक है! मैं अभी तुम्हारे गले की हड्डी निकाल देता हूँ। भेडि़ये ने अपना जबड़़ा फैलाया। सारस ने फौरन अपनी गर्दन भेडि़ये के गले में डालकर हड्डी बाहर निकाल दी।
अब मेरा ईनाम दो! सारस ने कहा।

                   "इनाम? कैसा इनाम?" भेडि़ये ने कहा, इनाम की बात भूल जाओ। भगवान का शुक्रिया अदा करो कि तुमने अपनी गर्दन मेरे गले में डाली और वह सही-सलामत बाहर चली आयी। इससे बड़़ा इनाम और क्या होगा?

शिक्षा - धूर्त की बातों में कभी नहीं आना चाहिए,
उन्हें एहसान भुलाते देर नहीं लगती।

11. नाग और चींटियाँ - Animal Stories in Hindi With Moral


                एक जंगल में एक नाग रहता था। वह रोज चिडि़यों के अंडो, छिपकलियों, चूहों, मेढकों, खरगोश, एवं छोटे-छोटे जानवरों को खाता रहता था। इस प्रकार छोटे-छोटे जीवों को खाकर दिन भर सुस्त पड़ा रहता। कुछ दिनों में ही वह काफी लंबा मोटा हो गया। उसका घमंड भी बहुत बढ़ गया।

               एक दिन नाग ने सोचा,"मैं जंगल में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ। मैं जंगल का राजा हूँ। अब मुझे अपनी प्रतिष्ठा और आकार के अनुकूल किसी बडे़ स्थान पर रहना चाहिए।
यह सोचकर उसने अपने रहने के लिए विशाल पेड़ का चुनाव किया। पेड़ के पास चींटियों का एक बिल था। वहाँ ढेर सारे मिटटी के छोटे-छोटे कण जमा थे।

               नाग ने कहा, "यह बवाल मुझे पसंद नहीं। यह गंदगी यहाँ नहीं रहनी चाहिए।" वह गुस्से से बिल के पास गया और उसने चींटियों से कहा, "मैं नागराज हूँ, इस जंगल का राजा! मै आदेश देता हूँ कि जल्द-से-जल्द इस कूडे़ को यहाँ से हटाओ और चलती बनो।"

               नागराज को देखकर अन्य जानवर थर-थर काँपने लगे। पर नन्हीं चींटियों पर उसकी धौंस का कोई असर नही पड़ा। अब नाग का गुस्सा बहुत बढ़ गया। उसने अपनी पूँछ से बिल पर कोडे़ की तरह जोर से प्रहार किया।

               इससे चींटियों को बहुत क्रोध आया। क्षण भर में हजार चींटियाँ बिल से निकलकर बाहर आ गईं। वे नाग के शरीर पर चढ़कर उसे काटने लगीं नागराज को लगा जैसे उसके शरीर में एक साथ हजारों काँटे चुभ रहे हों। वह असह्य वेदना से विह्वल हो उठा। असंख्य चींटियों से वह घिर गया था। उनसे छुटकारा पाने के लिए वह छटपटाने लगा। मगर इससे कोई फायदा नहीं हुआ। कुुछ देर तक वह इसी तरह संघर्ष करता रहा, पर बाद मे अत्यधिक पीड़ा से उसकी जान निकल गयी।

शिक्षा - किसी को छोटा नही समझना चाहिए,
व्यर्थ के घमंड से विनाश हो जाता है।

12. बारहसिंगे का सिंग और पैर - Animal Stories in Hindi for Kids


                   एक बारहसिंगा था। एक बार वह तालाब के किनारे पानी पी रहा था। इतने में उसे पानी में अपना प्रतिबिंब दिखाई दिया। उसने मन-ही-मन सोचा, मेरे सींग कितने सुंदर हैं। किसी अन्य जानवर के सींग इतने सुंदर नहीं हैं। इसके बाद उसकी नजर अपने पैरों पर पड़ी। उसे बहुत दुख हुआ।

                   मेरे पैर कितने दुबले-पतले और भद्दे हैं। तभी उसे थोड़ी दूर पर बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई दी।

                  बारहसिंगा डरकर तेजी से भागने लगा। उसने पीछे मुड़कर देखा। बाघ उसका पीछा कर रहा था। वह और तेज गति से भागने लगा। भागते-भागते वह बाघ से बहुत दूर निकल गया। आगे एक घनघोर जंगल था। वहाँ पहुँचकर उसे कुछ राहत मिली।

                 वह अपनी गति धीमी कर सावधानी पूर्वक आगे बढ़ने लगा। एकाएक उसके सींग एक पेड़ की डालियों में उलझ गए। बारहसिंगे ने अपने सींग छुड़ाने की बहुत कोशिश की, पर वे नहीं निकले। 

उसने सोचा, ओह! मैं अपने दुबले-पतले और भद्दे पैरो को कोस रहा था। पर उन्हीं पैरों ने बाघ से बचने में मेरी मदद की मैंने अपने सुंदर सींगों की बहुत तारीफ की! पर ये ही सींग अब मेरी मृत्यु का कारण बनने वाले हैं। इतने में बाघ दौड़ता हुआ आ पहुँचा उसने बारहसिंगे को मार डाला।

शिक्षा - सुंदरता से उपयोगिता अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।

13. मुर्गा और लोमड़ी - Animals Short Stories in Hindi


               एक जंगल में एक धूर्त लोमड़ी रहती थी। एक बार उसने एक मुर्गे को पेड़ की ऊँची डाल पर बैठे हुए देखा। लोमड़ी ने मन-ही-मन सोचा, "कितना बढि़या भोजन हो सकता है यह मेरे लिये?" पर मुश्किल यह थी कि वह पेड़ पर चढ़ नही सकती थी। वह चाहती थी कि किसी तरह मुर्गा नीचे उतर आए। 

               इसलिए लोमड़ी पेड़ के नीचे गई। उसने मुर्गे से कहा, "मुर्गा भाई, आपके लिए एक खुशखबरी है। स्वर्ग से अभी-अभी आदेश आया है कि अब से सभी पशु-पक्षी मिल-जुलकर रहेंगे। अब वे कभी एक-दूसरे को नहीं मारेंगे। लोमडि़याँ भी अब मुर्गे मुर्गियों को नही खाएँगी। इसलिए तुम्हें मुझसे डरने की जरूरत नहीं है। नीचे आ जाओ! हम लोग बैठकर आपस में बातें करेंगे।"

               मुर्गे ने कहा," वाह-वाह! यह तो तुमने बड़ी अच्छी खबर सुनाई। वह देखो, तुम्हारे कुछ दोस्त भी तुमसे मिलने के लिए आ रहे है।"

मेरे दोस्त! लोमड़ी ने आश्चर्य से कहा, "मेरे कौन-से दोस्त आ रहे है? वही शिकारी कुत्ते! मुर्गे ने मुस्कराते हुए कहा।

शिकारी कुत्तों का नाम सुनते ही लोमड़ी भय से काँपने लगी। उसने भागने के लिए जोर की छलाँग लगायी।

मुर्गे ने कहा, "तुम उनसे क्यों घबरा रही हो? अब तो हम लोग आपस में दोस्त बन गये हैं न?"
हाँ, हाँ यह बात तो है! लोमड़ी ने कहा, "पर इन कुत्तों को अभी शायद इस बात का पता नहीं होगा।"

यह कहकर लोमड़ी शिकारी कुत्तों के डर से सरपट भाग खड़ी हुई।

शिक्षा - धूर्त की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।

14. बिल्ली के गले मे घंटी - Animals Short Stories in Hindi


                  एक पंसारी था। उसकी दुकान में बहुत से चूहे रहते थे। वहाँ उनके खाने का भरपूर समान था। वे अनाज, सूखे मेवे, ब्रेड, बिस्कुट, जैम और चीज़ आदि छककर खाते थे।
चूहों के कारण पंसारी को काफी नुकसान होता था। एक दिन उसने सोचा, "इन चूहों से छुटकारा पाने के लिए मुझे कुछ उपाय करना चाहिए। वरना ये तो मुझे कहीं का नहीं छोडेगें।

                  एक दिन दुकनदार एक बड़ी और मोटी-सी बिल्ली ले आया। उसने उसे दुकान में छोड़ दिया। अब चूहे खुलेआम घूम-फिर नहीं सकते थे। बिल्ली रोज किसी न किसी चूहे को पकड़ती और उसे मारकर खा जाती।

                   धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होने लगी। इससे चूहों को बहुत चिंता हुई। उन्होंने इसका उपाय ढूँढने के लिये सभा की। सबने एक स्वर मे कहा, "हमें इस बिल्ली से छुटकारा पाना ही होगा"। पर छुटकारा पाने के लिए क्या करना चाहिए, यह उस सभा में किसी को नहीं सूझता था। 

                  तभी एक होशियार चूहे ने खडे़ होकर कहा, "बिल्ली बहुत चालाक है, वह दबे पाँव बड़ी फूर्ती से आती है। इसलिए हमें उसके आने का पता ही नही चलता। हमें किसी तरह उसके गले में एक घंटी बाँध देनी चाहिए।"

दूसरे चूहे ने इसका समर्थन किया, "वाह क्या बात कही है! जब बिल्ली चलेगी, तो उसके गले की घंटी बजेगी। हम घंटी की आवाज सुनकर सावधान हो जाएँगे। हम इतने फासले पर रहेंगे कि वह हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेगी।"

                   सभी चूहों ने इस सुझाव का समर्थन किया। सारे चूहे खुशी से नाचने लगे। तभी एक बूढे़ चूहे ने कहा, "खुशियाँ मनाना बंद करो। मुझे सिर्फ इतना बताओ कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधेगा?" यह सुनते ही सारे चूहे चुप हो गये। वे एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। उन्हें इस सवाल का कोई जवाब नहीं सूझा।

शिक्षा - जिस सुझाव पर अमल न हो सके,
वह सुझाव किस काम का!

15. डरपोक खरगोश - Moral Animal Stories in Hindi


                          एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही डरपोक था। कहीं जरा-सी भी आवाज सुनाई पड़ती तो वह डरकर भागने लगता। डर के मारे वह हर वक्त अपने कान खड़े रखता। इसलिए वह कभी सुख से सो नहीं पाता था। 

                          एक दिन खरगोश एक आम के पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी पेड़ से एक आम उसके पास आकर गिरा। आम गिरने की अवाज सुनकर वह हड़बड़ा कर उठा और उछलकर दूर जा खडा हुआ। "भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।" चिल्लाता हुआ सरपट भागने लगा। 

                          रास्ते में उसे एक हिरन मिला। हिरन ने उससे पूछा, "अरे भाई तुम इस तरह भाग क्यों रहे हो? आखिर मामला क्या है? खरगोश ने कहा, अरे भाग, भाग! जल्दी भाग! आसमान गिर रहा है। हिरन भी डरपोक था। इसलिए वह भी भयभीत होकर उसके साथ भागने लगा।

भागते-भागते दोनो जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, "भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।"

उनकी देखादेखी डर के मारे जिराफ, भेडि़या, लोमडी, गीदड़, तथा अन्य जानवरों का झुंड भी उनके साथ भागने लगा। सभी भागते-भागते एक साथ चिल्लाते जा रहे थे, भागो! भागो! आसमान गिर रहा है। 

उस समय सिंह अपनी गुफा में सो रहा था। जानवरो का शोर सुनकर वह हडबड़ाकर जाग उठा। गुफा से बाहर आया, तो उसे बहुत क्रोध आया। उसने दहाड़ते हुए कहा, रूको! रूको! आखिर क्या बात है?


सिंह के डर से सभी जानवर रूक गए। सबने एक स्वर मे कहा, "आसमान नीचे गिर रहा है।"

                          यह सुनकर सिंह को बड़ी हँसी आई। हँसते-हँसते उसकी आँखो में आँसू आ गए। उसने अपनी हँसी रोककर कहा, "आसमान को गिरते हुए किसने देखा है?" सब एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। अंत में सभी की निगाह खरगोश की ओर मुड़ गई तभी उसके मुँह से निकला, "आसमान का एक टुकड़ा तो उस आम के पेड़ के नीचे ही गिरा है।"

"अच्छा चलो, हम वहाँ चलकर देखते हैं।" सिंह ने कहा। 

सिंह के साथ जानवरों की पूरी पलटन आम के पेड़ के पास पहुँची सबने इधर-उधर तलाश की। किसी को आसमान का कोई टुकड़ा कहीं नजर नही आया। हाँ, एक आम जरूर उन्हे जमीन पर गिरा हुआ दिखाई दिया। 

सिंह ने आम की ओर इशारा करते हुए खरगोश से पूछा, "यही है, आसमान का टुकड़ा, जिसके लिए तुमने सबको भयभीत कर दिया?"

अब खरगोश को अपनी भूल समझ में आई। उसका सिर शर्म से झुक गया। वह डर के मारे थर-थर काँपने लगा।

दूसरे जानवर भी इस घटना से बहुत शार्मिंदा हुए। वे अपनी गलती पर पछता रहे थे कि सुनी-सुनाई बात से डरकर वे बेकार ही भाग रहे थे।

शिक्षा - सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

16. भेड़ के वेश मे भेड़िया - Best Animal Stories in Hindi


                    एक दिन एक भेडि़ए को कहीं से भेड़ की खाल मिल गई। खाल ओढ़कर वह मैदान मे चर रही भेड़ों के झुंड मे शामिल हो गया। भेडि़ए ने सोचा,"सूर्य अस्त हो जाने के बाद गड़रिया भेड़ों को बाड़े में बंद कर देगा। भेड़ों के साथ मैं भी बाडे़ मे घुस जाऊँगा। रात को किसी मोटी भेड़ को उठा कर भाग जाऊँगा और मजे से खाऊँगा।" 

                    शाम हुई तो गड़रिया भेड़ों को बाड़े में बंद कर घर चला गया। भेडि़या चुपचाप अँधेरा होने का इंतजार करने लगा। धीरे-धीरे अँधेरा गहराने लगा। यहाँ तक तो सब कुछ भेडि़ए की योजना के अनुसार ही हुआ। फिर एक अनहोनी घटना घट गई।

                   एकाएक गड़रिए का नौकर बाडे़ मे आया। उसके मालिक ने रात के भोजन के लिए किसी मोटी भेड़ को लाने के लिए उसे भेजा था। संयोग से नौकर भेड़ की खाल ओढ़े भेडि़ए को ही उठाकर ले गया और उसे हलाल कर डाला। 
भेडि़या भेड़ खाने के लिए आया था, परंतु उस रात वह गड़रिए और उसके मेहमानों का आहार बन गया।

शिक्षा - बुरा सोचने वाले का अंत बुरा ही होता है।

17. चतुर खरगोश - Short Animal Stories in Hindi


एक जंगल में शेर और अन्य प्राणियों के बीच समझौता हुआ था। शेर के भोजन के लिए रोज एक प्राणी को उसकी गुफा में जाना पड़ता था। एक दिन एक खरगोश की बारी आई। उसे शेर के भोजन के समय तक उसकी गुफा में पहुँचना था। खरगोश बहुत चतुर था। उसने दुष्ट शेर को खत्म करने की योजना बनाई। 

                   खरगोश जानबूझकर बहुत देर से शेर के पास पहुँचा। अब तक शेर के भोजन का समय बीत चुका था। उसे बहुत जोर की भूख लगी थी। इसलिए खरगोश पर उसे बहुत गुस्सा आया।
”तुमने आने में इतनी देर क्यो कर दी?“ शेर ने गरजते हुए पूछा। 

”महराज, क्या करूँ?“ खरगोश ने बहुत ही नम्रतापूर्वक जवाब दिया,
”रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया था। वह मेरा पीछा करने लगा। बहुत मुश्किल से मैं उससे पिड छुड़ाकर यहाँ आ पाया हूँ।“ 

”दूसरा शेर? और वह भी इस जंगल में?“ शेर ने गरजते हुए पूछा। 

”हाँ महाराज, दूसरा शेर! वह कहाँ रहता है, यह मुझे मालूम है। आप मेरे साथ चलिए। मैं आपको अभी दिखता हूँ।“ खरगोश ने कहा। शेर खरगोश के साथ तुरंत ही चल पड़ा। खरगोश उसे एक कुएँ के पास ले गया और बोला, ”महराज, यहाँ रहता है वह। आइए, अंदर देखिए।“ शेर ने कुँए में झाँककर देखा। पानी में उसे अपनी ही परछाईं दिखाई दी। 

उसने उस परछाईं को ही दूसरा शेर समझ लिया और गुस्से में आकर जोर से गर्जना की। उसने देखा कि कुँए का शेर भी उसकी ओर देखकर दहाड़ रहा है। तब शेर अपने गुस्से पर काबू न रख सका। उसने कुएँ में छलाँग लगा दी और पानी में डूबकर मर गया। इस तरह शेर का अंत हो गया।

शिक्षा - बुद्धि ताकत से बड़ी होती है।

18. गधे का दिमाग - Animals Short Stories in Hindi for Kids


                     एक था शेर। वह जंगल का राजा था। एक सियार उसका मंत्री था। शेर रोज अपने भोजन के लिये एक जानवर का शिकार करता था। इस शिकार मे से एक हिस्सा सियार को मिलता था। मंत्री के रूप में सेवा करने का यह उसका मेहनताना था। 

                      एक दिन शेर बीमार हो गया। वह शिकार करने के लिए गुफा से बाहर नहीं जा सका। उसने सियार से कहा, ”आज मैं शिकार के लिये बाहर नही जा सकता। पर मुझे बहुत जोर की भूख लगी है। तुम जाओ किसी प्राणी को ले आओ ताकि उसे खाकर मै अपनी भूख मिटा सकूँ।“ 

सियार ने मन में विचार किया, “कोई जानवर अपनी खुशी सेे शेर की गुफा मे नही आयेगा! तो अब मै क्या करूँ!“ बहुत विचार करने पर उसे एक तरकीब सूझी। उसने सोचा “गधा सबसे बेवकूफ प्राणी है। मै उसे झाँसा देकर यहाॅ ला सकता हूँं। “ 

                       सियार गधे के पास गया। और बोला, “गधे भाई में तुम्हारे लिए एक खुशखबरी लाया हूँ। जंगल के राजा ने तुम्हे अपना मंत्री बनाने का निश्चय किया है। तुम अभी मेरे साथ चलकर उनसे भेंट कर लो।“ 

यह सुनकर गधे को बहुत खुशी हुई। वह सियार के साथ शेर की गुफा मे गया उसको देखते ही भूखा शेर उस पर टूट पड़ा और उसे मार डाला। फिर उसने सियार से कहा, “मैं नदी में स्नान करके आता हूँ। तब तक तुम इस शिकार का ख्याल रखना।“ 

शेर नदी की ओर चला गया। सियार भी बहुत भूखा था। शेर के वापस आने से पहले वह गधे के दिमाग को चट कर गया। जब शेर वापस लौटा उसने गधे की ओर देखा कहा “इस प्राणी का दिमाग कहाँ है ?“

सियार ने मुस्कराते हुए कहा, “महाराज अगर गधे को दिमाग होता तो क्या वह यहाँ आता। गधे को तो दिमाग होता ही नही।“

शिक्षा - धूर्त अपनी चालाकी से नही चूकता

19. मोर और सारस - Animals Stories in Hindi With Moral


                         एक मोर था। वह बड़़ा ही घमंडी था और अपनी सुंदरता का बखान करता रहता था। वह रोज नदी के किनारे जाता, पानी में अपनी परछाईं देखता और अपनी सुंदरता की तारीफ करता। 

वह कहता, जरा मेरी पूँछ तो देखो। कितने मनमोहक रंग हैं मेरे पंखों के! वास्तव में मैं दुनिया के सभी पक्षियों से अधिक सुंदर हूँ।

                      एक दिन मोर को नदी के किनारे एक सारस दिखाई दिया। उसने सारस को देखकर मुँह फेर लिया। सारस का अपमान करते हुए उसने कहा, कितने रंगहीन पक्षी हो तुम! तुम्हारे पंख तो एकदम सादे और फीके हैं।

सारस ने कहा, तुम्हारे पंख सचमुच बहुत सुंदर हैं। मेरे पंख तुम्हारे पंखों जितने सुंदर नहीं हैं। पर इससे क्या होता है? तुम अपने पंखों से ऊँची उड़़ान तो नहीं भर सकते! जबकि मैं अपने पंखों से आसमान में बहुत ऊँचाई तक उड़ सकता हूँ। इतना कहकर सारस उड़ता हुआ आकाश में बहुत ऊँचे चला गया। मोर शर्मिंदगी से उसकी ओर देखता ही रह गया।

शिक्षा - केवल सुंदरता की अपेक्षा उपयोगिता अधिक महत्वपूर्ण हैं।

20. भेड़िया और मेमना - Animal stories for kids


                   एक मेमना था। एक दिन वह झरने पर पानी पीने गया। वह पानी पी रहा था कि उसी समय एक भेडि़या भी वहाँ पानी पीने के लिए आया। मेमने को देखकर भेडि़ए ने सोचा, इस नन्हे मेमने का मांस निश्चित रुप से बहुत मुलायम और स्वादिष्ट होगा। मुझे अपने आहार के लिए इसका शिकार करना चाहिए।

                   भेडि़या मेमने के पास गया और कहने लगा, तुम मेरे पीने का पानी गंदा कर रहे हो, मेमने ने कहा, यह कैसे हो सकता है? पानी तो आपकी तरफ से बहकर मेरी तरफ आ रहा है।

भेडि़ए ने कहा, मुझसे बहस मत करो। तुम शायद वही उजड्ड प्राणी हो, जिसने पिछले महीने मुझे गाली दी थी।

मैं तो पिछले महीने पैदा भी नहीं हुआ था। मेमने ने आश्चर्य से उसकी ओर देखते हुए कहा। 

तो फिर पिछले महीने तेरी माँ ने मुझे गाली दी होगी, कहते हुए भेडि़या बेचारे मेमने पर टूट पड़ा और उसे मार ड़ाला।

शिक्षा - खतरनाक लौगों की छाया से भी दूर रहना चाहिए।

21. कौवा और कबूतर - New Animal Stories in Hindi


                    एक किसान के खेत में रोज कौओं का एक विशाल झुंड आ जाता था। इससे उसकी खड़ी फसल का बहुत नुकसान होता था। किसान इन कौओं से परेशान हो गया था। आखिर उसने क्रुद्ध होकर कौओं को सबक सिखाने का निश्चय किया।

                    एक दिन उसने अपने खेतो में जाल बिछा दिया। जाल के ऊपर उसने अनाज के कुछ दाने बिखेर दिए। कौओ की नजर दानों पर पड़ी। ज्योंही वे दाने चुगने के लिए नीचे उतरे, सब-के-सब जाल में फँस गए। किसान जाल में फँसे कौओं को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने कहा, अच्छा हुआ चोरों, अब मैं तुम में से किसी को नहीं छोड़ूँगा। तभी किसान को एक करुण अवाज सुनाई दी। उसे सुनकर किसान को बड़ा आश्चर्य हुआ। उसने ध्यान से जाल में देखा। कौओं के साथ उसमें एक कबूतर भी फँसा हुआ था। 

                   किसान ने कबूतर से कहा, अरे इस टोली में तू कैसे शामिल हो गया? पर मैं तुम्हें भी छोड़नेवाला नही हूँ। बुरे लोगों की संगती का फल तुम्हे भोगना ही पड़ेगा। फिर किसान ने अपने शिकारी कुत्तों को इशारा कर दिया। कुत्ते दौड़ते हुए आ पहुँचे और उन पक्षियों पर टूट पड़े। एक-एक कर उन्होंने सबका काम तमाम कर दिया।

शिक्षा - बुरे लोगों की संगती दुखदायी होती है।

22. पुण्यात्मा बाघ -  Animal Stories in Hindi with Moral      


एक जंगल में एक बाघ रहता था। वह बहुत बूढ़ा हो गया था। उसमें अब पहलेवाली ताकत और फुर्ती नहीं रह गयी थी। उसने सोचा, "अब मैं शिकार कर नहीं सकता। इसलिए पेट भरने के लिए मुझे कोई अन्य उपाय करना होगा।" बहुत सोचने-विचारने के बाद उस बाघ को एक युक्ति सूझी। उसने घोषणा की, "अब मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूँ, इसलिए मैं अपनी बाकी जिंदगी पुण्यकर्मो में लगाऊँगा। अब से मैं घास और फल खाकर अपना गुजारा करुँगा और निरंतर प्रभु के नाम का स्मरण करुँगा। इसलिए जंगल के पशु-पक्षियों को मुझसे डरने की अब कोई जरुरत नहीं है।"

                      कुछ भोलेभाले जानवर बाघ की चिकनी-चुपड़ी बातो में आ गए। वे कहने लगे,कितना महान संत है यह! हमें चलकर इसके दर्शन करने चाहिए।इस प्रकार हर रोज कुछ जानवर बाघ के दर्शन के लिए उसकी गुफा में जाने लगे। बाघ इन भोलेभाले जानवरों को देखते ही उन पर टूट पड़ता और उन्ह मारकर खा जाता। इस प्रकार बूढ़ा बाघ आराम से अपना पेट भरने लगा। 

एक दिन एक लोमड़ी को इस पुण्यात्मा बाघ के बारे मंे जानकारी मिली। उसने मन-ही-मन कहा, मैं बाघ की बातों पर विश्वास नहीं करती। बाघ भला घास और फल खाकर कैसे जिंदा रह सकता हैं? मैं खुद जाऊँगी और सच्चाई का पता लगाकर रहूँगी।

                      दूसरे दिन लोमड़ी बाघ की गुफा पहुँची। गुफा के प्रवेशद्वार पर पहुँचकर वह ठिठक गई। वहाँ जमीन पर गुफा में गए हुए जानवरो के पंजों एवं खुरों के निशान पड़े हुए थे। लोमड़ी ने बारीकी से उन निशानों का निरीक्षण किया उसे फौरन पता चल गया कि गुफा में जानेवाले जानवरों के पंजो एवं खुरो के निशान तो दिखाई देते हैं, पर गुफा से बाहर निकलनेवाले किसी जानवर के पैरों के निशान कहीं नहीं हैं। लोमड़ी मन-ही-मन कहा, इस ढोंगी पुण्यात्मा को जिंदा रखने के लिए मैं अपनी जान नही दूँगी। वह गुफा के दरवाजे से लौट आई।

शिक्षा - मक्कार की चिकनी-चुपड़ी बातों के चक्कर में कभी नहीं आना चाहिए।

23. शेर का हिस्सा Best Animal Stories in Hindi for Kids


                       एक घनघोर जंगल था। उस जंगल में अनेक जानवर रहते थे। एक दिन रीछ, भेडि़या, लोमड़ी तथा शेर साथ-साथ शिकार करने निकले। शेर इन सब का अगुआ था। शीघ्र ही उन्होंने एक भैंस पर हमलाकर उसे मार ड़ाला। लोमड़ी ने भैंस के चार हिस्से किए। सभी जानवर अपना-अपना हिस्सा खाने के लिए बेताब हो रहे थे। 

                       तभी शेर ने दहाड़ते हुए कहा, "सब लोग शिकार से दूर हट जाओ और मेरी बात सुनो। शिकार का पहला हिस्सा मेरा है। क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगों का सहयोगी था।

दूसरे हिस्से पर भी मेरा ही अधिकार है। क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगो का अगुआ था। तीसरा हिस्सा भी मेरा ही है। क्योकी यह हिस्सा मुझे अपने बच्चो के लिए चाहिए। अब रहा चौथा हिस्सा! 

यदि तुम में से किसी को यह हिस्सा चाहिए, तो आ जाओ,मुझसे लड़ाई में जीतकर ले जाओ अपना हिस्सा।
रीछ,भेडि़या और लोमड़ी नें चारो हिस्से शेर को दे दिए और वहाँ से चुपचाप खिसक गए।

शिक्षा - जिसकी लाठी उसकी भैंस! 


दोस्तों यह थी top 23 Moral Animal s Stories in Hindi. ये सभी कहानियाँ नैतिक है। और इन कहानियों से बच्चों को बहुत मदद मिलेगी।

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