22+ Best Moral Stories in Hindi for Class 1 | Hindi Stories

22+ Best Moral Stories in Hindi for Class 1

Moral Stories in Hindi for class 1: Hello friends, how are you? Today I am sharing the top 22 moral Hindi stories for class 1. These short stories in Hindi are very valuable for class 1 and give very good morals.

आज के इस आर्टिकल मे, मै आप के साथ best 22 short stories in Hindi for class 1 with moral share कर रहा हूँ। ये हिंदी नैतिक कहानियाँ बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी होगी। ये सभी कहानियों के अंत मे नैतिक शिक्षा दी गयी हैं। जो बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने मे बहुत मदद करेगी।


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आईये इन top 22 moral stories in Hindi for class 1 पढ़ते हैं।


Top 22 Moral Short Stories in Hindi for Class 1


9 Best Moral Stories in Hindi for Class 1


(1). प्यासा कौआ - Moral stories in Hindi for class 1

 

जून का महीना था। बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। इसी गर्मी मे एक कौआ बहुत प्यासा था। प्यास के कारण उसका गला सूख रहा था।

 

वह पानी की तलाश में इधर उधर भटक रहा था, लेकिन उसे कहीं भी पानी नही दिखाई दिया। तेज धूप के कारण सारे जलाशय सूख गये थे।

 

वह पानी के तलाश मे भटकता हुआ जंगल से शहर आ गया। लेकिन उसे शहर मे भी कहीं पानी नही मिला। अंत में वह हार कर एक मकान के छत पर बैठ गया।

 

कौवा निराश बैठा था तभी उसे छत एक कोने पर एक घड़ा दिखाई दिया। वह तेजी से घड़े के पास गया। उसने उसमें झाँककर देखा तो उसमे थोड़ा-सा पानी था। लेकिन उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकती थी।

 

घड़े के पास कुछ कंकड़ बिखरे पड़े थे। इन कंकड़ को देख कर तुरंत उसे एक उपाय सूझा। वह इन कंकड़ो को उठाकर घडे़ में डालने लगा। कंकड़ डालने पर धीरे-धीरे घड़े का पानी ऊपर आने लगा। अब कौए की चोंच पानी के सतह तक पहुँचने लगी। कौए ने जी-भर कर पानी पिया, प्यास बुझाई और खुशी से काँव-काँव करता उड़ गया।

 

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। कठिन परिस्थिति में भी मेहनत करने से सफलता मिल जाती है।


(2). अंगूर खट्टे हैं - Short stories in Hindi for class 1

 

एक दिन की बात है, एक भूखी लोमड़ी भोजन के तलाश मे अंगूर के बगीचे में जा पहुँची। बगीचे मे बहुत सारे पके हुए अंगूरों के गुच्छे लटक रहे थे।

 

फिर क्या था। पके हुए अंगूरों को देख कर भूखी लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। मुँह ऊपर की ओर बढ़ाते हुए उसने अंगूरों को पाने की कोशिश की। लेकिन अंगूर काफी ऊँचाई पर होने के कारण वह अपने पहले प्रयास मे सफल न हो सकी। उन अंगूरो को पाने के लिए लोमड़ी बहुत उछली, लेकिन उसके सभी प्रयास बेकार हो गए। आखिरकार थक कर उसने उम्मीद छोड़ दी और वहाँ से जाने लगी।

 

जाते-जाते उसने कहा, "अंगूर खट्टे हैं। ऐसे खट्टे अंगूर कौन खाएगा?"

 

Moral of this Hindi Story for class 1

 

शिक्षा - हार मानने में हर्ज क्या? जब कोई किसी वस्तु को प्राप्त करने के लिए कोशिश करता है लेकिन फिर भी सफल नही हो पाता है, तो वह अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए उस वस्तु को ही तुच्छ साबित करने की कोशिश करता है। जबकि हमे उस चीज को पाने के लिए अलग तरीके से मेहनत करनी चाहिए।


(3). खरगोश और कछुआ - Class 1 Stories in Hindi with moral

 

बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल मे कछुआ और खरगोश दो मित्र रहते थे। कछुआ खरगोश के मुकाबले मे बहुत धीरे चलता था। खरगोश को अपने तेज चाल पर घमंड था। वह हमेशा कछुए की चाल देख कर खूब हँसता था।

 

एक दिन खरगोश ने कछुए से दौड़ की शर्त लगाई। तय समय पर दौड़ शुरू हुई। खरगोश ने तेज दौड़ लगाई और जल्दी ही कछुए से आगे निकल गया।

 

खुद को दौड़ मे आगे पाकर खरगोश ने सोचा, अभी कछुआ बहुत पीछे हैं। शर्त जीतने की इतनी जल्दी क्या है? कछुआ जब तक आएगा तब तक पेड़ के नीचे बैठकर थोड़ा आराम कर लेता हूँ। जब कछुआ यहाँ आएगा, तो दौड़कर मैं उससे आगे निकल जाऊँगा और शर्त जीत लूंगा।


 

यह सोचकर खरगोश पेड़ की छाया में आराम करने लगा। लंबी दौड़ के कारण वह बहुत थक गया था। जिसके कारण खरगोश को नींद आ गयी। कछुआ अब भी बहुत पीछे था।

 

कुछ देर बाद जब खरगोश की आँख खुली तो उसने देखा कि कछुआ बहुत आगे चला गया है और विजय-रेखा पारकर मुस्करा रहा है।

 

कछुआ रेंगते हुए भी शर्त जीत गया जबकि खरगोश शर्त हार गया।

 

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की धैर्य और लगन से काम करनेवाला ही विजयी होता है। हमे कभी भी खुद पर घमंड नही करना चाहिए।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 1 की 3 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 4th Moral Stories in Hindi for class 1.


(4). चालाक लोमड़ी - Hindi stories for class 1st with moral

 

एक दिन की बात है, एक छोटा सा बच्चा अपने हाथ में एक रोटी का टुकड़ा लेकर खेल रहा था। तभी एक कौवे ने बच्चे के हाथ से रोटी छीन ली।

 

उसके बाद तेजी से उड़ता हुआ एक पेड़ की ऊँची डाली पर जा बैठा और रोटी खाने लगा। तभी रास्ते से गुजर रहे एक लोमड़ी की नजर कौवे पर पड़ी। कौवे के मुँह मे रोटी का टुकड़ा देख लोमड़ी के मुँह में पानी भर आया। वह तुरंत ही पेड़ के नीचे जा पहुँची। उसने कौए की ओर देख कर कहा, कौए राजा, नमस्ते। आप अच्छे तो है?

 

कौवा रोटी खाने मे व्यस्त था इसलिए कोई जवाब नही दिया।

 

लोमड़ी ने दोबारा कहा, कौए राजा, आप बहुत चमकदार और सुंदर दिख रहे हैं। आपकी आवाज भी बहुत मधूर है। क्या आप मुझे एक गाना सुना सकते हैं।

 

मूर्ख कौए को अपनी प्रशंसा सुनकर रहा नहीं गया। वह तुरंत बिना कुछ सोचे गाना गाने लगा। उसने जैसे ही गाने के लिए अपनी चोंच खोली तो चोंच में दबी रोटी नीचे आ गिरी।

 

बस क्या था, जैसे ही रोटी जमीन पर गिरी, लोमड़ी रोटी उठाकर फौरन भाग गयी।

 

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है की हमे झूठी तारीफ करनेवाले से सावधान रहना चाहिए। दूसरे के बहकावे मे नही आना चाहिए।


(5). लालची कुत्ता - Moral Hindi stories for class 1

 

एक बार एक कुत्ता भोजन की तलाश में इधर उधर भटक रहा था। काफी भटकने के बाद उसे एक होटल के सामने हड्डी का एक छोटा सा टुकड़ा मिल गया।

 

हड्डी का टुकड़ा पाकर कुत्ता बहुत खुश हुआ और शहर के दूसरे कुत्तों से बचने के लिए जंगल की तरफ भागने लगा।

 

रास्ते में एक पुल था। कुत्ता जब नदी पार कर रहा था तो उसे पानी में अपनी ही छाया दिखाई दी। उसे लगा कि नदी में कोई दूसरा कुत्ता है और उसके मुँह मे भी हड्डी का एक टुकड़ा है।

 

इस कुत्ते के मन में दूसरे हड्डी के टुकड़े को भी लेने का ख्याल आया। हड्डी के टुकड़े को छिनने के लिए उसने दूसरे कुत्ते पर भौंकने के लिये मुँह खोला, तो उसके मुँह से हड्डी का टुकड़ा नदी मे जा गिरा। दूसरे हड्डी के लालच में उसने अपने मुँह की हड्डी भी गँवा दी।

 

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की लालच का फल बुरा होता है।


(6). मधुमक्खी और कबूतर - Short Stories in Hindi for class 1


एक बार एक मधुमक्खी थी उड़ती हुई एक तालाब के ऊपर से जा रही थी। किसी कारणवश, अचानक वह तालाब के पानी में गिर गई। वह पूरी तरह पानी में भीग गयी।  उसके पंख गीले हो गए जिसके कारण अब वह उड़ नही सकती थी। अब उसकी मृत्यु निश्चित थी।


उसी तालाब के किनारे एक बहुत पड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर बैठा एक कबूतर मधुमक्खी को पानी में डूबते हुए देख कर बचाने का फैसला किया। उसने तुरंत पेड़ से एक पत्ता तोड़ा और उसे अपनी चोंच में दबाकर तालाब में मधुमक्खी के पास गिरा दिया। धीरे-धीरे मधुमक्खी उस पत्ते पर चढ़ गई। जल्दी ही उसके पंख सूख गये। जान बचने पर उसने कबूतर को धन्यवाद दिया और फिर उड़ कर दूर चली गई।


इस घटना के कुछ दिन बाद ही कबूतर पर एक संकट आया। वह उसी पेड़ की एक डाली पर आँख मूंद कर आराम से सो रहा था। तभी एक शिकारी ने अपने धनुष से कबूतर पर निशाना साधा। आँख मूंद कर आराम से सो रहा कबूतर इस खतरे से अनजान था। लेकिन मधुमक्खी ने शिकारी को कबूतर पर निशाना साधते हुए देख लिया था। मधुमक्खी ने कबूतर की जान बचाने का निश्चय किया। 



वह तुरंत उड़कर शिकारी के पास पहुँची। उसने शिकारी के हाथ में जोर से डस लिया। फिर क्या था, शिकारी के हाथ से धनुष गिर पड़ी। वह दर्द के मारे जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगा। शिकारी की चीख सुनकर कबूतर की नींद खुल गयी। वह जल्द ही पूरी घटना समझ गया। उसने अपनी जान बचाने के लिए मधुमक्खी को धन्यवाद दिया और मजे से उड़ गया।


शिक्षा - अच्छे लोग हमेशा दूसरो की मदद करते हैं। हमें भी हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए। क्या पता वह कभी हमारे काम आ सके, क्योंकि दूसरों का भला कभी व्यर्थ नही होता है।


07. शेर और चूहा - New story in Hindi for class 1


मई का महीना था। झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही थी। दोपहर में जंगल का राजा शेर पेड़ की छाया में सो रहा था। उसी पेड़ के पास बिल में एक चूहा रहता था। वह भी खेलने के लिये अपने बिल से बाहर निकला और सोए हुए शेर के पास उछाल कूद करने लगा। इससे शेर की नींद टूट गयी। उसने चूहे को अपने  पंजे मे धर दबोचा। बेचारा छोटा चूहा डर से काँपने लगा और चीं-चीं करते हुए शेर से कहा, "हे जंगल के राजा, कृपया मुझे माफ कर दीजिए। मुझे छोड़ दीजिये। इस अहसान का बदला एक दिन मैं जरूर चुका दूगाँ।"


नन्हे चूहे के ये शब्द सुनकर शेर जोर से हँस पड़ा। उसने कहा, " तुम तो बड़ी चालाक हो, इतना छोटा होकर मुझ जैसे ताकतवर जंगल के राजा की तू क्या मदद करेगा? फिर भी शेर को नन्हे से चूहे पर दया आ गयी। उसने चूहे को छोड़ दिया। चूहा वहां से भाग निकला। 


कुछ दिन के बाद चूहे ने शेर की दर्द भरी दहाड़ सुनी। वह तुरंत अपने बिल से बाहर निकला। उसने देखा कि शेर एक बड़े से संकट में फँस गया है। और इस समय मै उसकी मदद कर सकता हूँ। 


शेर एक शिकारी के जाल मे फँस गया था। उसने जाल से निकलने की बहुत कोशिश की, पर उसे सफलता नही मिली। चूहा दौड़ता हुआ शेर के पास आया। उसने शेर से कहा, "हे जंगल के राजा, आप बिलकुल भी चिंता न करें। मै अभी आप को इस शिकारी के जाल से बहार निकलता हूँ। चूहा अपने तेज दाँतो से जाल को कुतरने लगा। और फिर शेर जाल से मुक्त हो गया।


शेर ने चूहे को धन्यवाद दिया और अपनी गुफा की ओर चल दिया।


शिक्षा - छोटे जीवों की शक्ति को कम नही आँकना चाहिए। जी हाँ बच्चों, हमें कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 1 की 7 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 8th Moral Stories in Hindi for class 1.


08. दो बकरे - Hindi stories for class 1 with moral


एक बार की बात है, काले और भूरे रंग के दो बकरे थे। एक दिन वे दोनों झरने पर बने पुल से गुजर रहे थे। काला बकरा पुल के एक किनारे से और भूरा बकरा दूसरे किनारे से आ रहा था। पुल के बीचो-बीच दोनों बकरो का आमना-सामना हुआ। दोनों एक दूसरे के सामने अकड़कर खड़े हो गए। पुल बहुत ही पतला था। एक बार में उस पुल पर से एक ही जानवर पुल से जा सकता था। 


काले बकरे ने भूरे बकरे से गुर्रा कर कहा, "तू मेरे रास्ते से हट जा।" भूरे बकरे ने भी इसी प्रकार गुर्रा कर जवाब दिया, "अबे कालिए, वापस चला जा, वरना मैं तुझे इस झरने में फेंक दूँगा।" 


थोड़ी देर तक दोनो एक-दूसरे को धमकाते रहे। लेकिन किसी ने हार नहीं मानी और दोनों एक दूसरे से भिड़ गए। फिर क्या था! पतले पुल पर दोनों अपना-अपना संतुलन खो बैठे और झरने मे जा गिरे। पानी के तेज धारा के साथ दोनों बहने लगे। और थोड़ी देर में ही दोनों डूब कर मर गए।



कुछ दिन बाद, इसी प्रकार दो बकरियाँ इसी पुल के बीचो बीच आमने-सामने आ गईं। लेकिन ये दोनो बहुत समझदार और चालाक थीं। उनमें से एक बकरी बैठ गई और दूसरी बकरी को अपने शरीर के ऊपर से जाने दिया। उसके जाने के बाद वह खड़ी हो गई और धीरे-धीरे चल कर उसने भी पुल पार कर लिया।


शिक्षा - क्रोध दुख का मूल है, शांति खुशी की खान है। 


09. राजू और बेरवाला - Moral short stories for class 1 in Hindi 


किसी गांव में राजू नाम का लड़का रहता था। वह बहुत चतुर और निडर लड़का था। एक दिन वह स्कुल से लौटते समय एक बेरवाले से बेर खरीदे। बेरवाले ने राजू को छोटा बच्चा समझ कर वजन मे कम बेर दिए। लेकिन चतुर राजू बेरवाले की चालाकी देख रहा था। 


उसने तुरंत बेरवाले से पूछा, तुम मुझे वजन में कम बेर क्यों दे रहे हो?


मक्कार बेरवाले ने कहा, मै वजन में काम बेर इसलिए दे रहा हूँ ताकि तुम्हे ले जाने में आसानी हो। फिर राजू ने झटपट कुछ पैसे बेरवाले की हथेली पर रखे और तेजी से वहां से जाने लगा। 


बेरवाले ने पैसे गिने। पैसे कम थे। उसने तेज रफ़्तार से जा रहे राजू को वापस आने के लिए आवाज लगायी।  जब राजू नजदीक आया तो उसने पूछा, तुमने मुझे कम पैसे क्यों दिए?


राजू  ने तुरंत कहा, मैंने तुम्हे काम पैसे इसलिए दिए ताकि तुम्हे गिनने मे आसानी हो।


शिक्षा - तो बच्चों, इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की हमें हमेशा निडरता और चालाकी से काम लेना चाहिए। क्योंकि चालाक के साथ चालाकी नहीं चलती। 


10. असली माँ - Moral Stories in Hindi for Class 1


 एक बार दो स्त्रियाँ एक बच्चे के लिए झगड़ रही थीं। प्रत्येक स्त्री यह दावा कर रही थी कि वही उस बच्चे की असली माँ है। जब किसी तरह झगड़ा नहीं सुलझा तो लोगों ने उन दोनों को न्यायधीश के सामने पेश किया।

न्यायधीश ने ध्यानपूर्वक दोनों की दलीलें सुनीं। न्यायधीश के लिए भी यह निर्णय करना मुश्किल हो गया कि बच्चे की असली माँ कौन थी। न्यायधीश ने बहुत सोच-विचार किया। अखिरकार उसे एक उपाय सूझा। उसने अपने कर्मचारी को आदेश दिया, ”इस बच्चे के दो टुकड़े कर दो और एक-एक टुकड़ा दोनों स्त्रियों को दे दो।“ 


न्यायधीश का आदेश सुनकर उनमें से एक स्त्री ने धाड़ मारकर रोते हुए कहा,

”नहीं, नहीं! ऐसा जुल्म मत करो। दया करो सरकार। भले ही यह बच्चा इसी स्त्री को दे दो, लेकिन मेरे लाल को जिंदा रहने दो! मैं बच्चे पर अपना दावा छोड़ देती हूँ।“ 

पर दूसरी स्त्री कुछ नहीं बोली। वह चुपचाप यह सब देखती रही।


अब चतुर न्यायधीश को मालूम हो गया था कि बच्चे की असली माँ कौन है। उसने बच्चा उस स्त्री को सौप दिया, जो उस पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार थी। उसने दूसरी स्त्री को जेल भेज दिया।


शिक्षा - सच्चाई की सदा विजय होती है।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 1 की 10 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 11th Moral Stories in Hindi for class 1.


11. दो घड़े - Moral Stories in Hindi for Class 1


एक बार एक नदी में जोरो की बाढ़ आई। तीन दिनों के बाद बाढ़ का जोर कुछ कम हुआ। बाढ़ के पानी में ढेरों चीजें बह रही थीं। उनमें एक ताँबे का घड़ा एवं एक मिट्टी का घड़ा भी था। ये दोनों घड़े अगल-बगल तैर रहे थे।


ताँबे के घड़े ने मिट्टी के घड़े से कहा, अरे भाई, तुम तो नरम मिट्टी के बने हुए हो और बहुत नाजुक हो अगर तुम चाहो, तो मेरे समीप आ जाओ। मेरे पास रहने से तुम सुरक्षित रहोगे।


मेरा इतना ख्याल रखने के लिए अपको धन्यवाद, मिट्टी का घड़ा बोला, मैं आपके करीब आने की हिम्मत नहीं कर सकता। आप बहुत मजबूत और बलिष्ठ हैं। मैं ठहरा कमजोर और नाजुक कहीं हम आपस में टकरा गए, तो मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। यदि आप सचमुच मेरे हितैषी हैं, तो कृपया मुझसे थोड़ा दूर ही रहिए।


इतना कहकर मिट्टी का घड़ा तैरता हुआ ताँबे के घड़े से दूर चला गया।


शिक्षा - ताकवर पड़ोसी से दूर रहने में ही भलाई है।


12. बलवान कौन - Moral Stories in Hindi for Class 1


एक बार हवा और सूर्य में बहस छिड़ गई।


हवा ने सूर्य से कहा, मैं तुमसे ज्यादा बलवान हूँ।

नही, तुम मुझसे ज्यादा बलवान नही हो। सूर्य ने प्रतिवाद किया।


तभी उनकी नजर विश्व-भ्रमणपर निकले एक यात्री पर पड़ी। यात्री ने शाल ओढ़ रखी थी। हवा और सूर्य ने तय किया कि उनमें से जो भी उस यात्री की शाल उतरवाने में सफल होगा, वही बलवान कहलाएगा।


पहली बारी हवा की आई। वह यात्री के कंधे से शाल उड़ाने के लिए पूरी ताकत से बहने लगी। पर हवा जितनी ज्यादा तेजी से बहती, यात्री उतना ही कसकर शाल को शरीर से लपेटने लगता। यह संघर्ष तब तक चलता रहा जब तक कि हवा की बारी खत्म नहीं हो गई।


अब सूर्य की बारी आई। वह जरा-सा मुस्कराया। इससे यात्री को गरमी महसूस होने लगी। उसने जल्दी ही शाल की पकड़ ढीली कर दी। सूर्य की मुस्कराहट बढ़ती गई। इसके साथ गरमी भी बढती गई। फिर गरमी ने विकराल रूप धारण कर लिया। यात्री को अब शाल ओढ़ने की जरूरत नहीं रही। उसने शाल उतारकर हाथ में ले ली। इस प्रकार सूर्य हवा से ज्यादा शक्तिशाली सिद्ध हुआ।


शिक्षा - केवल धौंस जमाने से कोई ताकतवर नही माना जाता है।


13. गवांर किसान - Moral Stories in Hindi for Class 1


एक किसान था। वह पढ़ा-लिखा नहीं था। वह अकसर लोगों को अखबार व किताबें पढ़ने के लिए चश्मा लगाते देखा करता था। वह सोचता, अगर मेरे पास भी चश्मा होता, तो तैं भी इन लोगो की तरह पढ़ सकता। मुझे भी शहर जाकर अपने लिए चश्मा खरीद लाना चाहिए।


एक दिन वह शहर गया। चश्मे की एक दुकान में पहुँचकर उसने दुकानदार से कहा कि मुझे पढ़ने के लिए चश्मा चाहिए। दुकानदार ने उसे तरह-तरह के चश्मे दिखाए। उसने पढ़ने के लिए उसे एक पुस्तक भी दी। किसान ने एक-एक कर अनेक चश्मे लगाकर देखे। पर वह कुछ भी नही पढ़ सका। उसने दुकानदार से कहा, इसमें से कोई भी चश्मा मेरे काम का नहीं है।


दुकानदार ने शंकाभरी नजर से किसान की ओर देखा। फिर उसकी नजर किताब पर पड़ी। किसान ने किताब उल्टी पकड़ रखी थी।

दुकानदार ने कहा, शायद तुम्हे पढ़ना नहीं आता?


किसान ने कहा, मुझे पढ़ना नहीं आता। इसीलिए तो मैं चश्मा खरीद रहा हूँ, ताकि दूसरों की तरह मैं भी पढ़ सकूँ। पर इनमें से किसी भी चश्मे से मैं पढ़ नही पा रहा हूँ

दुकनदार को अपने अनपढ़ ग्राहक की असली परेशानी का पता चला, तो वह बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी रोक सका।


उसने किसान को समझाते हुए कहा, मेरे दोस्त, तुम बहुत भोले और अज्ञानी हो। सिर्फ चश्मा लगा लेने भर से किसी को पढ़ना-लिखना नहीं आ जाता! चश्मा लगाने से सिर्फ साफ-साफ दिखाई देने लगता है। पहले तुम पढ़ना-लिखना तो सीखो। फिर तुम्हें बिना चश्मे के भी पढ़ना आ जाएगा।


शिक्षा - अज्ञान ही अंधत्व है।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Moral Stories in Hindi for Class 1 की 13 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 14th Moral Stories in Hindi for class 1.


14. तीन चोर - Moral Stories in Hindi for Class 1


तीन चोर थे। एक रात उन्होंने एक मालदार आदमी के यहाँ चोरी की। चोरों के हाथ खूब माल लगा। उन्होंने सारा धन एक थैले में भरा और उसे लेकर जंगल की ओर भाग निकले। जंगल में पहुँचने पर उन्हें जोर की भूख लगी। वहाँ खाने को तो कुछ था नहीं, इसलिए उनमें से एक चोर पास के एक गाँव से खाने का कुछ सामान लाने गया। बाकी के दोनों चोर चोरी के माल की रखवाली के लिए जंगल में ही रहे।


जो चोर खाने का सामान लाने गया था, उसकी नीयत खराब थी। पहले उसने होटल में खुद छककर भोजन किया। फिर उसने अपने साथियों के लिए खाने का समान खरीदा और उसमें तेज जहर मिला दिया। उसने सोचा कि जहरीला खाना खाकर उसके दोनों साथी मर जाएँगे तो सारा धन उसी का हो जाएगा।


इधर जंगल में दोनो चोरों ने खाने का समान लाने गए अपने साथी चोर की हत्या कर डालने की योजना बना ली थी। वे उसे अपने रास्ते से हटाकर सारा धन आपस में बाँट लेना चाहते थे।


तीनों चोरों ने अपनी-अपनी योजनाओं के अनुसार कार्य किया। पहला चोर ज्योंही जहरीला भोजन लेकर जंगल में पहुँचा कि उसके साथी दोनों चोर उसपर टूट पड़े। उन्होंने उसका काम तमाम कर दिया। फिर वे निश्चिंत होकर भोजन करने बैठे। मगर जहरीला भोजन खाते ही वे दोनों भी तड़प-तड़प कर मर गए।


इस प्रकार इन बुरे लोगों का अंत भी बुरा ही हुआ।


शिक्षा - बुराई का अंत बुरा ही होता है।


15. साहूकार का बटुवा - Short Stories in Hindi for Class 1


एक बार एक ग्रामीण साहूकार का बटुआ खो गया। उसने घोषणा की कि जो भी उसका बटुआ लौटाएगा, उसे सौ रूपए का इनाम दिया जाएगा। बटुआ एक गरीब किसान के हाथ लगा था। उसमें एक हजार रूपए थे। किसान बहुत ईमानदार था। उसने साहूकार के पास जाकर बटुआ उसे लौटा दिया।


साहूकार ने बटुआ खोलकर पैसे गिने। उसमे पूरे एक हजार रूपये थे। अब किसान को इनाम के सौ रूपए देने मे साहूकार आगापीछा करने लगा। उसने किसान से कहा, "वाह! तू तो बड़ा होशियार निकला! इनाम की रकम तूने पहले ही निकाल ली।"


यह सुनकर किसान को बहुत गुस्सा आया। उसने साहूकार से पूछा, "सेठजी, आप कहना क्या चाहते हैं?"


साहूकार ने कहा, "मैं क्या कह रहा हूँ, तुम अच्छी तरह जानते हो। इस बटुए में ग्यारह सौ रूपए थे। पर अब इसमें केवल एक हजार रूपये ही हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि इनाम के सौ रूपए तुमने इसमें से पहले ही निकाल लिये हैं।"


किसान ने कहा, "मैंने तुम्हारे बटुए में से एक पैसा भी नहीं निकाला है। चलो, सरपंच के पास चलते हैं, वहीं फैसला हो जाएगा।"


फिर वे दोनों सरपंच के पास गए। सरपंच ने उन दोनों की बातें सुनीं। उसे यह समझते देर नहीं लगी कि साहूकार बेईमानी कर रहा है।


सरपंच ने साहूकार से कहा, "आपको पूरा यकीन है कि बटुए में ग्यारह सौ रूपए थे?"

साहूकार ने कहा, "हाँ हाँ, मुझे पूरा यकीन है।"

सरपंच ने जवाब दिया, "तो फिर यह बटुआ आपका नहीं है।"

और सरपंच ने बटुआ उस गरीब किसान को दे दिया।


शिक्षा - झूठ बोलने की भारी सजा भुगतनी पड़ती है। 


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Moral Stories for Class 1 in Hindi की 15 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 16th Moral Stories in Hindi for class 1.


16. एकता का बल - Short Stories in Hindi for Class 1


एक किसान था। उसके पाँच बेटे थे। सभी बलवान और मेहनती थे। पर वे हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। किसान यह देख कर बहुत चिंतित रहा करता था। वह चाहता था कि उसके बेटे आपस में लड़ाई-झगड़ा न करें और मेलजोल से रहें। किसान ने अपने बेटों को बहुत समझाया और डाँटा-फटकारा भी, पर उनपर इसका कोई असर नहीं हुआ।


किसान को हमेशा यही चिंता सताती रहती कि वह अपने बेटों में एकता कैसे कायम करे! एक दिन उसे अपनी समस्या का एक उपाय सूझा। उसने अपने पाँचों बेटों को बुलाया। उन्हें लकडि़यों का एक गट्ठर दिखाकर उसने पूछाँ, "क्या तुममें से कोई इस गट्ठर को खोले बिना तोड़ सकता है?"


किसान के पाँचों बेटे बारी-बारी से आगे आए। उन्होंने खूब ताकत लगाई। पर उनमें से कोई भी लकडि़यों का गट्ठर तोड़ नही सका।

फिर किसान ने गट्ठर खोलकर लकडि़यों को अलग-अलग कर दिया। उसने अपने बेटों को एक-एक लकड़ी देकर उसे तोड़ने के लिए कहा। सभी लड़कों ने बहुत आसानी से अपनी-अपनी लकडी तोड़ डाली।


किसान ने कहा,"देखा! एक-एक लकड़ी को तोड़ना कितना आसान होता है। इन्हीं लकडि़यों को एक साथ गट्ठर में बाँध देने पर ये कितनी मजबूत हो जाती हैं। इसी तरह तुम लोग मिल-जुल कर एक साथ रहोगे, तो मजबूत बनोगे और लड़ झगड़कर अलग-अलग हो जाओगे, तो कमजोर बनोगे।"


शिक्षा - एकता में ही शक्ति है, फूट में ही है विनाश।


17. हँसमुख सरदार - Best Moral Stories in Hindi for Class 1


 बहुत दिनों की बात है। एक बहादुर सरदार था। उसने अनेक लड़ाइयाँ लड़ी थीं और उनमें अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया था। वह एक मँजा हुआ तलवारबाज और कलाबाज घुड़सवार था। इतना ही नहीं, वह दिल का भी बहुत उदार था। वह सदा गरीबों और जरूरतमंद लोगों की सहायता किया करता था। असहाय लोगों की रक्षा करना वह अपना कर्तव्य समझता था। लोग उसे सच्चे दिल से प्यार करते थे। वे उसकी अच्छाइयों का गुणगान करते और उसका बहुत सम्मान करते थे। 


पर इस सरदार के बारे में एक रहस्य की बात थी, जो किसी को मालूम नहीं थी। यहाँ तक की उसके घनिष्ठ मित्रों तक को भी इसका पता नहीं था। सरदार बिल्कुल गंजा था। अपने गंजेपन को छिपाने के लिए वह बालों की टोपी पहना करता था। यह टोपी उसके सिर पर इस प्रकार बैठ जाती थी कि उसके गंजेपन के बारे में किसी को रंचमात्र भी शंका नहीं होती थी।

एक बार सरदार अपने कुछ मित्रों के साथ जंगल में शिकार खेलने गया। वे अपने घोड़ों को सरपट दौड़ाते जा रहे थे कि तभी अकस्मात बड़े जोरो की आँधी आई और सरदार की बालों की टोपी उड़कर दूर जा गिरी। सरदार के गंजेपन का रहस्य खुल गया।


सरदार के मित्र उसकी गंजी खोपड़ी देखकर दंग रह गए। उन्हें सपने में भी यह ख्याल नहीं था कि उनका हँसमुख सरदार गंजा है। वे ठठाकर हँस पड़े। उन्होंने कहा, "वाह, आपका सिर तो अंडे़ की तरह सफाचट है। आप हमेशा अपने आप को जवान साबित करते रहे और हमें बेवकूफ बनाते रहे!"


"हाँ, मैं हमेशा अपना गंजापन छिपाने का प्रयास करता रहा। पर मुझे मालूम था कि एक दिन मेरा यह राज खुलकर रहेगा। जब मेरे अपने बालों ने मेरा साथ नहीं दिया तो दूसरों के बाल मेरे सिरपर सदा के लिए कैसे रह सकते हैं?" यह कहकर सरदार हो, हो करता हुआ खिलखिलाकर हँस पड़ा।


 जब सरदार के मित्रों ने देखा कि वह स्वयं अपने आपपर हँस रहा है, तो वे उस पर हँसने के कारण बहुत शर्मिंदा हुए। उन्होंने सरदार से कहा, "सरदार, आप वाकई बहुत दिलदार हैं।"


शिक्षा - जो अपने पर हँस सकता है, वह कभी हँसी का पात्र नहीं बन सकता।


18. बाजीराव पेशवा और किसान - Moral Stories for Class 1 in Hindi


 बाजीराव पेशवा मराठा-सेना के प्रधान सेनापति थे। एक बार वे अनेक लड़ाइयों मे विजय हासिल करके अपनी सेना सहित राजधानी लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने मालवा में अपनी सेना का पड़ाव डाला। बहुत दूर से चलते-चलते आ रहे उनके सैनिक थककर चूर हो गए थे। वे भूख-प्यास से व्याकुल थे और उनके पास खाने के लिए पर्याप्त सामग्री भी नहीं थी।


बाजीराव ने अपने एक सरदार को बुलाकर आदेश दिया, तुम अपने साथ सौ सैनिकों को लेकर जाओ और किसी खेत से फसल कटवाकर छावनी में ले आओ।


सरदार सेना की एक टुकड़ी लेकर गाँव की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसे एक किसान दिखाई दिया। सरदार ने उससे कहा, देखो, तुम मुझे इस इलाके के सबसे बड़े खेतपर ले चलो। किसान उन्हें एक बहुत बड़े खेत के पास ले गया। सरदार ने सैनिकों को आदेश दिया, सारी फसल काट लो और अपने-अपने बोरों में भर लो।


यह सुनकर किसान चकरा गया। उसने हाथ जोड़कर कहा, महाराज, आप इस खेत की फसल न काटें। मैं आपको एक दूसरे खेतपर ले चलता हूँ। उस खेत की फसल पककर एकदम तैयार है।


सरदार और उसके सैनिक किसान के साथ दूसरे खेत की ओर चल पड़े। यह खेत वहाँ से कुछ मीलों की दूरी पर और बहुत छोटा था। किसान ने कहा, महाराज, आपको जितनी फसल चाहिए, इस खेत से कटवा लीजिए।


सरदार को किसान की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया। उसने किसान से पूछा, यह खेत तो बहुत छोटा हैं। फिर तुम हमें वहाँ से इतनी दूर क्यों ले आए?

किसान ने नम्रतापूर्वक उत्तर दिया, महाराज, नाराज मत होइए। वह खेत मेरा नहीं था। यह खेत मेरा है। इसीलिए मैं आपको यहाँ ले आया।


किसान के जवाब से सरदार का गुस्सा ठंड़ा हो गया। वह अनाज कटवाए बिना ही पेशवा के पास पहुँचा। उसने यह बात पेशवा को बताई। पेशवा को अपनी गलती का एहसास हो गया। वे सरदार के साथ स्वयं किसान के खेत पर गए। उन्होंने किसान को उसकी फसल के बदले ढेर सारी अशरफियाँ दीं और फसल कटवाकर छावनी पर ले आए।


शिक्षा - नम्रता का परिणाम हमेशा अच्छा होता है।


दोस्तों अभी तक आप Top 22 Hindi Moral Stories for class 1 की 18 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 19th Moral Stories in Hindi for class 1.


19. चार मित्र - Short Stories for Class 1 in Hindi


एक गाँव में चार मित्र रहते थे। उनमें से तीन बहुत ही विद्वान थे। पर वे व्यावहारिक ज्ञान की दृटि से एकदम कोरे थे। 

चोथा मित्र पढ़ा-लिखा तो कम था, पर वह व्यावहारिक ज्ञान में माहिर था। 


एक बार चारों मित्र अपना-अपना भाग्य आजमाने राजधानी की ओर चल पड़े़। रास्ते में एक जंगल आया।

वहाँ उन्हें एक पेड़ के नीचे कुछ हड्डियाँ दिखाई दी। उनमें से एक व्यक्ति ने उन हड्डियों का निरक्षण करते हुए कहा, ये हड्डियाँ किसी शेर की हैं। इन हड्डियों को एकत्र कर मैं अपनी विद्या से मरे हुए शेर का कंकाल तैयार कर सकता हूँ।


दूसरे विद्वान ने कहा, मैं अपने ज्ञान के बल से उस कंकाल पर मांस चढ़ा कर एवं रक्त से भरकर उसे खाल से ढक सकता हूँ।

तीसरे विद्वान ने कहा, मैं अपनी विद्या से इस निर्जीव प्राणी को जीवित कर सकता हूँ।


व्यावहारिक ज्ञान में माहिर चैथे मित्र को अपने तीनों मित्रों की बातें सुनकर बड़ा आश्र्चय हुआ। उसने अपने विद्वान मित्रों को सावधान करते हुए कहा, मित्रो, शेर को जीवित करना खतरे से खाली नहीं होगा।


यह सुनकर पहले विद्वान ने कहा, अरे, यह तो मूर्ख है! इस बेवकूफ को हमारे ज्ञान से ईष्र्या हो रही है।

दोनो विद्वान मित्रों ने भी उसका समर्थन किया। यह देखकर वह समझदार व्यक्ति दौड़कर एक पेड़ पर चढ़ गया। तीनों विद्वान मित्रों ने अपने-अपने ज्ञान का प्रयोग करना शुरू कर दिया।

पहले विद्वान ने सारी हड्डियाँ एकत्र कर उसका कंकाल तैयार किया। दूसरे विद्वान ने कंकाल पर मांस चढ़ाकर वे रक्त से भरकर उसे खाल से ढ़क दिया। 


तीसरे ने अपनी विद्या का प्रयोग कर उस निर्जीव शेर में जान डाल दी। जान आते ही शेर दहाड़ता हुआ खड़ा हो गया और तीनोंपर टूट पड़ा। तीनों विद्वान वहीं ढेर हो गए।

व्यावहारिक ज्ञान एवं सूझबझ के कारण चोैथे मित्र की जान बच गई।


शिक्षा - ज्ञान का अव्यावहारिक उपयोग बड़ा ही खतरनाक होता है। 


20. चतुर बीरबल - Moral Stories in Hindi for Class 1


एक दिन अमीर आदमी बीरबल के पास आया। उसने बीरबल से कहा, "मेरे यहाँ सात नौकर हैं। उनमे से किसी ने मोतियो से भरा मेरा बटुआ चुरा लिया है। कृपया आप मेरी मदद कीजिए। और उस चोर को खोज निकालिए।"


बीरबल उस अमीर के घर गए। उन्होने सातो नौकरो को एक कमरे मे बुलाकर कहा, "देखो! मेरे पास सात जादुई छडि़याँ है। इस समय इन सभी छडि़यो की लम्बाई समान है। मैं तुममे से हर एक को एक एक छड़ी देता हूँ। तुममे से जिसने चोरी की होगी उसकी छड़ी बढ़ जाएगी।" 


जिस नौकर ने बटुआ चुराया था वह बीरबल की बात सुनकर बहुत भयभीत हो गया। उसने सोचा! "मैं अपनी छड़ी काटकर एक इंच छोटी कर देता हूँ। तो बच जाऊँगा!" अंत में उसने अपनी छड़ी काटकर एक इंच छोटी कर दी अगले दिन बीरबल ने एक एक कर सातो नौकरो की छडि़याँ देखी। उनमे से एक की छड़ी एक इंच छोटी थी बीरबल उसकी ओर उगँली से इशारा करते हुए बोले, ये रहा चोर! यह सुनते ही उस नौकर ने अपना अपराध स्वीकार किया उसने मोतियों से भरा बटुआ अपने मालिक को लौटा दिया। फिर उसे जेल भेज दिया गया।गया।


21. सम्राट और बुढ़ा आदमी - Moral Stories in Hindi for Class 1


जापान के एक सम्राट के पास बीस सुंदर फूलदानियों का एक दुर्लभ संग्रह था। सम्राट को अपने इस निराले संग्रह पर बड़ा अभिमान था। एक बार सम्राट के एक सरदार से अकस्मात एक फूलदानी टूट गई इससे सम्राट को बहुत गुस्सा आया उसने सरदार को फाँसी का आदेश दे दिया। पर एक बूढ़े ब्यक्ति को इस बात का पता चला वह सम्राट के दरबार में हाजिर हुआ। और बोला, "मै टूटी हुई फूलदानी जोड़ लेता हूँ मै उसे इस तरह जोड़ दूगाँ कि वह पहले जैसी दिखाई देगी।" बूढ़े की बात सुनकर सम्राट बड़ा खुश हुआ। 


उसने बूढ़े को बची हुई फूलदानियो को दिखाते हुए कहा, "ये कुल उन्नीस फूलदानियाँ है। टूटी हुई फूलदानी इसी समूह की है। अगर तुमने टूटी हुई फूलदानी जोड़ दी तो मैं तुम्हे मुँह माँगा इनाम दूँगा।" सम्राट की बात सुनते हुए बूढ़े ने लाठी उठाई और तड़ातड़ सभी फूलदानियाँ तोड़ दी। 


यह देखकर सम्राट गुस्से से आग बबूला हो गया। उसने चिल्लाकर कहा, "बेवकूफ तूने यह क्या किया। बूढ़े आदमी ने सहजभाव से उत्तर दिया। महाराज मैंने अपना कर्तव्य निभाया है। इनमे से हर फूलदानी के पीछे एक आदमी की जान जानेवाली थी। मगर आप केवल एक आदमी की जान ले सकते हैं। सिर्फ मेरी!"


बूढ़े आदमी की चतुराई और हिम्मत देखकर सम्राट प्रसन्न हो गया। उसने बूढ़े आदमी और अपने सरदार दोनो को माफ कर दिया।


शिक्षा : - बुराई से लड़ने के लिए एक ही साहसी व्यक्ति काफी होता है।


दोस्तों अभी तक आप Best Moral Short Stories for Class 1 की 21 कहानियाँ पढ़ चुके हैं। और उम्मीद करते हैं की आगे की नैतिक कहानियाँ भी जरूर पढ़ेंगे। आईये पढ़ते हैं 22th Moral Stories in Hindi for class 1.


22. चार मुर्ख - Moral Stories in Hindi for Class 1


एक जंगल मे एक ऊँचे पेड़ पर एक काली चिडि़या रहती थी। जब वह गाती तो उसकी चोंच से सोने के दाने झड़ते थे। संयोग से एक दिन एक बहेलिए की नजर उस पर पड़ गयी। चिडि़या के मुँह से सोने के दाने झरते देख वह फूला नही समाया उसने मन ही मन कहा, "वाह! कितनी अच्छी तकदीर है मेरी! मैं इस चिडि़या को पकड़ कर अपने घर ले जाऊँगा। यह मुझे रोज सोने के दाने देगी। मैं धनवान हो जाऊँगा।"


फिर बहेलिए ने चिडि़या को पकड़ने के लिए उसने जमीन पर अपना जाल फैलाकर उस पर चावल के कुछ दाने बिखेर दिए। काली चिडि़या दाने चुगने नीचे उतरी और जाल मे फँस गई। बहेलिए ने चिडि़या को पकड़ लिया फिर उसे वह अपने घर ले गया। उस दिन से बहेलिए को रोज सोने के दाने मिलने लगे। देखते देखते वह अमीर आदमी बन गया। उसने सोचा! कि उसे कुछ प्रसिद्धि और सम्मान मिलना चाहिए। इसलिए उसने चिडि़या के लिए सोने का पिजड़ा बनवाया। फिर उसने वह चिडि़या राजा को भेंट कर दी। उपहार देते हुए राजा से कहा। महाराज!, "यह चिडि़या आपके महल मे मधुर गीत गाएगी। आपको सोने के कुछ दाने भी देगी।" 


यह उपहार पाकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ। उसने बहेलिए को अपने दरबार मे ऊँचा ओहदा दिया। जल्द ही राजा के पास ढेर सारे सोने के दाने जमा हो गए राजा ने वह सोने की चिडि़या रानी को भेंट कर दी। रानी ने पिंजड़े का दरवाजा खोलकर चिडि़या को आजाद कर दिया और सोने का पिजड़ा शाही सुनार को देकर कहा। इस सोने के पिजड़े से मेरे लिए सुंदर सुंदर गहने गढ़ दो। 


चिडि़या उड़ती हुई वापस जंगल मे चली गई। अब रोज सबेरे वह चार मूर्खो का गाना गाने लगी। 


पहली मूर्ख मैं थी। जो बहेलिए के जाल में फंसी।।

दूसरा मूर्ख बहेलिया था। जिसने मुझे राजा को भेंट कर दिया।।

तीसरा मूर्ख राजा था। जिसने मुझे रानी को दे दिया।। 

चौथी मूर्ख रानी थी। जिसने मुझे आजाद कर दिया।।

 

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दोस्तों यह थी best 22 Hindi Moral Stories for class 1. ये सभी कहानियाँ नैतिक है। और इन कहानियों से बच्चों को बहुत मदद मिलेगी।

 

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1 Comments

  1. Very nyc motivational speech maza aagya aisa hi motivate karte rahi sab log

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